मुस्कुराहटें हर दफ़ा खुशी का बयाँ नही होती..
कुछ मुस्कुराहटें महज़ ज़िन्दगी पे तंज़ करती है!!-saira
(tanz/ तंज़ = कटाक्ष / satire)
कभी सर से पैर तक,रूह से ईमान तक ,बदल जाते हैं लोग इश्क़ में
और कभी टस से म्स नही होते ....ये जिद्द भी अज़ब बीमारी है ! -saira
ये जो दीवार बना के बैठे हो अपने आस पास ..
इन दीवारों से घर नहीं बना करते ...
कुछ रिश्तों का आसरा लो तो कोई बात बने !!-saira
जाने क्या क्या ? देखते हैं लोग दोस्ती से पहले .....
कुछ नफ़ा,नुक्सान देखते हैं कुछ चहेरे और ज़ुबान देखते हैं ,
कुल मिला कर लोग ज्यादा कुछ नहीं महज़ एक कामयाब इंसान देखते हैं !!
कुछ मुस्कुराहटें महज़ ज़िन्दगी पे तंज़ करती है!!-saira
(tanz/ तंज़ = कटाक्ष / satire)
कभी सर से पैर तक,रूह से ईमान तक ,बदल जाते हैं लोग इश्क़ में
और कभी टस से म्स नही होते ....ये जिद्द भी अज़ब बीमारी है ! -saira
ये जो दीवार बना के बैठे हो अपने आस पास ..
इन दीवारों से घर नहीं बना करते ...
कुछ रिश्तों का आसरा लो तो कोई बात बने !!-saira
जाने क्या क्या ? देखते हैं लोग दोस्ती से पहले .....
कुछ नफ़ा,नुक्सान देखते हैं कुछ चहेरे और ज़ुबान देखते हैं ,
कुल मिला कर लोग ज्यादा कुछ नहीं महज़ एक कामयाब इंसान देखते हैं !!

Great explanation mam
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