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Monday, 12 January 2015

kuch ....

मुस्कुराहटें हर  दफ़ा खुशी का बयाँ नही होती..
कुछ मुस्कुराहटें महज़ ज़िन्दगी पे तंज़ करती है!!-saira
(tanz/ तंज़ = कटाक्ष / satire)

कभी सर से पैर तक,रूह से ईमान तक ,बदल जाते हैं लोग इश्क़ में 
और कभी टस से म्स नही होते ....ये जिद्द भी अज़ब बीमारी है ! -saira

ये जो दीवार बना के बैठे हो अपने आस पास ..
इन दीवारों से घर नहीं बना करते ...
कुछ रिश्तों का आसरा लो तो कोई बात बने !!-saira

जाने क्या क्या ? देखते हैं लोग दोस्ती से पहले .....
कुछ नफ़ा,नुक्सान देखते हैं कुछ चहेरे और ज़ुबान देखते हैं ,
कुल मिला कर लोग ज्यादा कुछ नहीं महज़ एक कामयाब इंसान देखते हैं !!



फिर से तनहा हूँ
रात हो गयी और दिया भी बुझ गया है
ता उम्र को शायद !! - saira

कोहराम मचा रखा है मेरी सर्द आहों ने ....
तेरे दिल का मौसम है जो बदलने का नाम नहीं लेता
- saira
तलवार पे रखा है दिल और जिगर 
जब से मोहबत की है ....
देखें ख़ुदकुशी करने की आदत से कौन बाज आएगा ??- saira

कौन कौन सा हिस्सा रफ़ू करूँ 
ज़िन्दगी के लिबास का ??
कभी ज़ेब सिलता है तो , 
कभी गरेबान फटने लगता है!!-saira

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