हम उसे बाद मुददत के याद आयें हैं वो आज कोई रिश्ता निभाने आयें हैं ज़ख्म अभी तो भरना बाकी है और वो फिर से नाशतर चुभाने आयें हैं!!#saira
रात ,दिन ,सुबह या शाम हो दौर ए इशक मे वकत ठहरा सा रहता है तनहाई मे भी मुझ पे तेरा पहरा सा रहता है!- saira(c)