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Saturday, 16 July 2016

Daur e ishq

रात ,दिन ,सुबह या शाम हो
दौर ए इशक मे वकत  ठहरा सा रहता है
तनहाई मे भी मुझ पे तेरा पहरा सा रहता है!- saira(c)

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