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Sunday, 28 December 2014

कीमतें

कौन रुकता है बे जा वक्त बर्बाद  करने को ..
हर लम्हें की कीमत है जो  लगता है हँसाने को रुलाने को  ....!! - saira

Saturday, 27 December 2014

tu

मैं कब से कहां तक जाऊ तुझे ढूंढने?
मुझे कभी तू  जुदा लगा ही नहीं,
तू कैसे रिश्ते तोड़ेगा 
 अब तक  तो तु जुड़ा भी नहीं, 
तु ऐसा दिल का  अरमान है
 जो मिला भी है और मिला भी नहीं
मेरे गम हैं ये जो भी 
तू दावा भी ,वजह भी 
छुट के  कहाँ जाऊं मैं 
तू जुड़ा भी जुदा भी  !!-Saira !!-Saira

Wednesday, 24 December 2014

आमीन


मैंने पा लिया तुझ को,
ख़ुदा तेरी तलाश जारी रखे!!
मैंने माना और माना लिया अपना जनून ए इशक़ ,
तेरी गुमनामी तेरा इम्तेहान जारी रहे !
मुझे जानता है ज़माना तेरे नाम से,
ख़ुदा तेरी गुमनामी तेरी गुम्श्दगी जारी रखे !!
तेरा रुतबा मुबारक तेरी दुनिया वालों को,
मेरा दिल तेरी दीवानगी जारी रखे!
मेरे हुस्न ओ इशक का सदका तू यु ही आबाद रहे ,
वफ़ा मेरी बर्बादी जारी रखे !
तू थाम कोइ हाथ मेहँदी वाला
मेरी आँख मेरे काजल की रवानी जारी रखे !
लाख मिल जाएँ तुझे प्यार जताने वाले,
और तेरी तरह वफाओं में कमी जारी रखे !!
तू मिले न मिले मुझको लेकिन
बस अपने खयालों मे तु मुझ को जारी रखे !!
तुझे गम न सताए कभी बे वफ़ा होने का ,
खुदा तुझ में बे परवाही जारी रखे !!
आमीन !!- सायरा

Sunday, 21 December 2014

रिश्ते...

रिश्ते
रिश्ते तब तक ही हैं जब तक हमारी मर्ज़ी से चलते हैं !
जहाँ तब तक ही रिश्ते रहते हैं
जब ज़रा उम्मीदों से बाहर का बहाव आया नहीं ,
कि वो बरसने लगते हैं किसी पुरानी छत की तरह ,
रिसने लगते हैं रिश्ते ,
जब वो चार दीवारी का सीला पन महसूस करना बंद कर देते हैं ,
हम कितने भी दरवाज़े खुले रखें,
मन के झरोखे बंद होने ही लगते हैं
और खुलने लगते हैं रिश्ते और उन धागों से बंधे लोग ,
आज़ाद होने लगते है ,अपने ही हाथ से बांधे हुए मन्नतों के धागों से ..
बड़ा अजीब होता है ये सवाल ,
जब हम कहते हैं कि लोग दूर क्यूँ हो जाते हैं ?
रिश्ते बदल क्यूँ जाते हैं ? लोग अलग क्यूँ हो जाते हैं,
बिखर क्यों जाते हैं? जब की सवाल का जवाब खुद होता है हमारे पास ....
वास्तव में हम स्वीकार नहीं कर पाते उस रिश्ते का बदलता रूप ,
नहीं स्वीकार कर पाते कि हमारे खिलाफ चला जाये वो ,
या नहीं चाहते की वो अपनी भी कोई जिद्द सामने रखे ,
हाँ ! सही भी है ना, कैसे कोई रिश्ता हमारी इच्छा के विपरीत जायेगा ?
वो तो हमारा है हम जैसा ही होगा ,साथ रहेगा तो हम सा ही रहेगा ,
या फिर सीली हुई दीवार की तरह किसी तूफ़ान वाले दिन में भरभरा के गिर जाएगा .
मर जायेगा ,
गिर जायेगा हमारे गरूर की तरह , हाँ रिश्ते रिसने लगते हैं ...
रोक थाम नहीं की जा सकती इस रिसने की ,
ये जो दिल की चार दीवारी है इसको भीतर छुपा तो सकती है ,
लेकिन बदलते मौसम की सर्दी गर्मी धुप और बारिश से बचा नहीं सकते ,
अज़ीब परिंदे हैं ये रिश्ते दिल के,
न कैद सहते हैं न आजाद रहते हैं !!-saira

तू ही तू !!

तू ही तू!
लोग तोड़ेंगे, मरोड़ेंगे होंसला
कभी बीच राह छोड़ जायेंगे ....
और मानते हैं  के वो जीत जायेंगे ..
लेकिन, वो बशर दिल खुदा का जीत जायेंगें  
जो उस रब की रज़ा में मुस्कुराएंगे ..
हर लम्हां उस की धुन को गुन्गुनायेगें ....
तू ही तू है हर सु...!
इन्सान में तु शैतान में तु
मेरी जात  में तू मेरी मात में तु
इश्क़ में और  नफरतों में तु 
 मोहब्बत में  ईमान में है
 हर शय में सारी  क़ायनात  में  तु
.तू ही तू है  हर सु ..!! -saira

रहना तु !!

रहना तु!!

तु पत्थर दिल है तो अब यही रहना .
पथरों से अक्सर ख़ुदा बनते है !!

तू खुशबू है तो यूँ ही महका करना ,
खुशबुओं से मन्दिर भी सज़ा करते हैं!!

तु अंगार है तो जलते रहना ,
इन से घर के चराग जलते है !!

तु फ़रेब है तो फरेबी रहना ,
नसीब वालों को ऐसे ख़िताब मिलते है!!

तु अजनबी है तो बस वही रहना ,
अजनबियों से मंज़िलों के पते मिलते है !!-saira

Saturday, 20 December 2014

रहने दे....!!

रहने दे!
मुझे कहने दे,सब कहने दे...
ये दिन रात की उलझन रहने दे..
थक गया दिल धड़क धड़क के,
अब रूह को भी चैन से बहने दे..
नही ख़बर तुझ को जो मेरी,
मुझ को भी बे फ़िक्र ही रहने दे..
ना तुम आना ना मैं आऊ,
....प्यार को किसी ताख पे रहने दे..
तू मसरूफ़ रहना इस दुनिया में
...मुझे अपने में ही  तु रहने दे ,
मुझे चाह नही चाँद सितारों की,
तेरे यादों के पत्थर रहने दे..
मुझे कहने दे ,सब कहने दे.....!!
मैं कुछ बोलु तुम कुछ सोचो
.. शिकवे शिक़ायत रहने दे..
अरमान नही कुछ ख़्वाब नही,
दिल की बात दिलों में रहने दे...
चल करते हैं दुनियादारी...
प्यार मोहब्त, इश्क, वफ़ा, सब रहने दे!!- saira

Quest!

Quest!
मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ,
बुधीमानो के घेरे में अपने तर्क को तोल रही हुँ!
सत्य अस्त्य के बीच भवर में डोल रही हुँ,
नाव लीए प्रेम प्यार की कोई माझी ख़ोज रही हुँ!
मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ,
समझाया है सब ने जीवन का मतलब फिर क्यूँ कोई और अर्थ मैं ख़ोज रही हुँ??
जीवन जी लेने का मोह नही है, पर माया का होना सोच रही हुँ!!
भगवान प्रेम है,प्रेम ही पूजा,प्रेम की उपज तो मैं भी हूँ ना??
सब प्रेम है आख़िर जग में...फिर क्यूँ?? इस का अस्तित्व टटोल रही हुँ!!
मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ!!
कह तो दिया दीपक ने रात के अंधेरे को ही बाटुंगा ,
फिर क्यूँ उसी के सहरे जीवन पथ को खोज रही हुँ!!
बुना हुआ सा स्वपन है जीवन, धागों का और छोर क्यूँ खोल रही हुँ
ऊन रिश्तों की गर्म बहुत है क्यूँ ख़ुद को झींझोर रही हुँ,
खुला खुला ये नील गगन है फिर क्यूँ अपना दम तोड़ रही हुँ!!
मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ!!-saira

Thursday, 18 December 2014

शहादत का इन्साफ अभी बाकी है!!!!!

शहादत का इन्साफ अभी बाकी है!!!!!
कितनी दहशत दिल में ले के
मेरा फरिश्ता मर गया होगा,
वहशत का शिकार,
सोच से बीमार ,
शैतान देख के मेरे बच्चे
तेरा ज़हन भी सहम गया होगा !
सामने कौन है? मौत या दरिंदा कोई ?
खुदा को भी तुने पुकारा होगा ....
अम्मा! अब्बा ! का नाम भी आया होगा
कराहट में तेरी !!
मैं नहीं जानती कैसा होगा कलेज़ा
उस आदम के बच्चे का
जिसे तेरी मासुम आँख में
ख़ुदा भी नज़र नहीं आया होगा !
तेरे दर्द का अहसास है मगर ..
मैं जी नहीं सकती वो लम्हां जो तु जी गया
मगर ज़िन्दा रहेगा खौफ़ मुझ में तेरी नन्ही बहन ,भाई
और तेरे दोस्तों की खातिर ...के वो बच गये हैं
और अभी दरिंदगी भी जिंदा है ....
खुन के करतों में फतेह देखने वाले अभी जिंदा हैं !
बे लगाम , बे लिहाज़ जाने किस कौम के हैं ?
इनकी शिनाख्त अभी बाकि है !
इन्सान को इन्सान की पहचान अभी बाकि है !
"ओ फरिश्ते " तु खुदा के घर है, तो उसी नीद से जगा दे...
खेल उसकी जन्नत के आँगन में,
के शोर ओ कोराम मचा दे ...
उसका जागना अभी बाकि है
तेरी शहादत का इन्साफ अभी बाकी है !!-saira

Wednesday, 17 December 2014

वहशत का शिकार,

शहादत का इन्साफ अभी बाकी है!!!!!
कितनी दहशत दिल में ले के
मेरा फरिश्ता मर गया होगा,
वहशत का शिकार !!
सोच से बीमार ,
शैतान देख के मेरे बच्चे
तेरा ज़हन भी सहम गया होगा !
सामने कौन है? मौत या दरिंदा कोई ?
खुदा को भी तुने पुकारा होगा ....
अम्मा! अब्बा ! का नाम भी आया होगा
कराहट में तेरी !!
मैं नहीं जानती कैसा होगा कलेज़ा
उस आदम के बच्चे का
जिसे तेरी मासुम आँख में
ख़ुदा भी नज़र नहीं आया होगा !
तेरे दर्द का अहसास है मगर ..
मैं जी नहीं सकती वो लम्हां जो तु जी गया
मगर ज़िन्दा रहेगा खौफ़ मुझ में तेरी नन्ही बहन ,भाई
और तेरे दोस्तों की खातिर ...के वो बच गये हैं
और अभी दरिंदगी भी जिंदा है ....
खुन के करतों में फतेह देखने वाले अभी जिंदा हैं !
बे लगाम , बे लिहाज़ जाने किस कौम के हैं ?
इनकी शिनाख्त अभी बाकि है !
इन्सान को इन्सान की पहचान अभी बाकि है !
"ओ फरिश्ते " तु खुदा के घर है, तो उसी नीद से जगा दे...
खेल उसकी जन्नत के आँगन में,
के शोर ओ कोराम मचा दे ...
उसका जागना अभी बाकि है
तेरी शहादत का इन्साफ अभी बाकी है !!-saira

Monday, 15 December 2014

laad pyar ,dular

 वो उंगली पकड़ के चलाता था., कभी सर का  साया बन जाता था,,,!
जिसकी तनख्वाह से खिलोने और घर का राशन आता था.. !
वो जो छोटी बड़ी ज़िद को हमारी पूरा कर दीखलता था..!
घर का चूल्हा जलता था तो कभी वो हाथ भी जल जाता था.!!
 हल्दी चूना लगता था कभी हलवा बन के आता था!!
डर लगता था जब रातों को उस आँचल  में तेरा बचपन छुप जाता था..!!.
थक गया है, हार गया है ,और कुछ बीमार हुआ है,,,अब वो  हो बूढा गया है ...जाने क्यूँ अब बोझ है तुम पे? जो कभी माँ बाबा का  लाड़,प्यार, दुलार कहलाता था!
सारा नही थोड़ा ही दे दो.. जो तुम पे खर्चा  करते थे.!
जो बचपन में मान से  माँ बाबा ,,,लाड़ प्यार, दुलार कहलाता था

 याद रहे वो सर का साया भी कहलाता था!!- saira

Quest-- खोज !

मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ
बुधीमानो के घेरे में अपने  तर्क को तोल रही हुँ!
सत्य अस्त्य के बीच भवर में डोल रही हुँ,
नाव लीए प्रेम प्यार की कोई माझी ख़ोज रही हुँ!
                             मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ
समझाया है सब ने जीवन का मतलब फिर क्यूँ कोई और अर्थ मैं ख़ोज रही हुँ??
जीवन  जी लेने का मोह नही है, पर माया का होना सोच रही हुँ!!
भगवान प्रेम है,प्रेम ही पूजा,प्रेम की उपज तो मैं भी हूँ ना??
सब प्रेम है आख़िर जग में...फिर क्यूँ?? इस का अस्तित्व टटोल रही हुँ!!
                             मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ!!
 कह तो दिया दीपक ने रात के अंधेरे को ही बाटुंगा ,
फिर क्यूँ उसी के सहरे जीवन पथ को  खोज रही हुँ!!
बुना हुआ सा स्वपन है जीवन, धागों का और छोर क्यूँ खोल रही हुँ
ऊन रिश्तों की गर्म  बहुत है क्यूँ ख़ुद को झींझोर रही हुँ,
खुला खुला ये नील गगन है  फिर क्यूँ अपना दम तोड़ रही हुँ!!


     मन, मस्तिष्क के द्वार अभी मैं खोल रही हुँ!!-saira

रहने दे!!


मुझे कहने दे,सब कहने दे...
ये दिन रात की उलझन रहने दे..
थक गया दिल धड़क धड़क के अब रूह को भी चैन से बहने दे..
नही ख़बर तुझ को जो मेरी मुझ को भी बे फ़िक्र ही रहने दे.. 
ना तुम आना ना मैं आऊ ....प्यार को किसी ताख पे रहने दे..
तू मसरूफ़ रहना इस दुनिया में ...मुझे जहनुम में ही बसने दे....... 
मुझे चाह नही चाँद सितारों की, तेरे यादों के पत्थर रहने ..
मुझे कहने दे ,सब कहने दे.....!! 
मैं कुछ बोलू तुम कुछ सोचो.. शिकवे शिक़ायत रहने दे..
अरमान नही कुछ ख़्वाब नही, दिल की बात दिलों में रहने दे...
चल करते हैं दुनियादारी...
.....प्यार मोहब्त, इश्क, वफ़ा, सब रहने दे!!- saira

Friday, 12 December 2014

तू ही तू!

तू ही तू!
लोग तोड़ेंगे, मरोड़ेंगे होंसला
कभी बीच राह छोड़ जायेंगे ....
और सोचेंगे के वो  जीत जायेंगे ..
लेकिन वो बशर जीतेंगे  दिल खुदा का
जो उसकी रज़ा में मुस्कुराएंगे ..
हर लम्हां उस की धुन को गुन्गुनायेगें ....
तू ही तू है हर सु...
 इन्सान में तु शैतान में तु
मेरी जीत में  तू मेरी हार में  तु
इश्क़ मोहब्बत रब है  तु,
.तू ही तू!!!
    - saira

सैलाब

सैलाबों की रफ़्तार नहीं बदला करती ,
हो दिल में होंसला तो,
दीवानों की तक़दीर, तद्बीर और तासीर नहीं बदला करती !!-saira

gao

  • गुनगुनाओ न मुझे फिर से बे-सुर ताल का कोई गीत सुनना है, मुस्कुराओ मुझे फिर से कोई ख़्वाब बुनना है !!-saira

Friday, 7 November 2014

तु मुझे सोचता है


ऐस नही की उसको फ़िक्र नही मेरी
हाँ वो ख़ुदा है तो सब  का  सोचता है !

किस किस को अता कर दे वो दिल का क़रार ?
वो इबादत और शिद्दत का वजन तोलता है !

लाख छुपा ले इश्क़ तू सारी दुनिया से
यह अज़ान बन के सारे शहर में कोंधता है !


सारी दुनिया अज़ीज़ उसको बस मेरे सिवा
क्या  सितमग़र है वफ़ा की इन्तहा खोजता है !!

मेरी फ़िक्र न  कर मैं ज़िन्दा रहुंगा,
भला मर के भी कोई दम तोड़ता है !!

होसला ए सफीना देखों, हावा बदले  या पानी की रवां  ,
नाख़ुदा बिन भी  कभी लहरों पे डोलता है !!

कोइ वादा खिलाफी का इलज़ाम  नही तुझ पे
 मैं जनता हु जुदा हो के भी तु मुझे सोचता है! -सायरा

हवन!!

हवन!!
कोई हवन ज़ारी है आज कल मेरे चार सु
मैं महसूस करता रहता हु ......
धुँआ आँख में लगता तो है पर दिखाई नहीं देता.,
सुखी हवन सामग्री के जलने की खुशबू है ,
और घी भी जलता रहता है महकता है !!....
आग की आँच है .......
जो भीतर सै बाहर आती है या सांस से मेरे भीतर जाती 
साफ़ साफ़ कुछ नहीं बस कुछ जल रहा है ..
ये रुह को कुंदन कर देगा रूह को जला के शायद ,
या फिर ख़ाक कर देगा ...मेरा हर ख्याल....
ये किसी शमशान से आ रहा या किसी मज़ार का
है ??? कुछ कह नहीं सकते लकिन ये जारी है
मुझे महसूस होता रहता है
कही कुछ बना रहा ख़ुदा या जला रहा है मेरे अन्दर का कुछ भयानक अंश
हवन ज़ारी है उसका किसी विनाश का या आविष्कार का !!- saira
किस्मत की बिसात पे है वो बशर लेकिन....
ज़िद्द है की इस से लड़ के ही खेल जीतेगा !!-saira

khamoshi

क्या बयां?? ....कुछ भी तो नही कहती तेरी ख़ामोशी मुझ से...
अंदाज़ और अंदाजों में बड़ा फर्क होता है !!-saira
kya bayaan???..kuch bhi to nahi kehti teri khamoshi mujh se..
andaaz aur andaazon mein bada farq hota hai !!- saira

Tuesday, 30 September 2014

दे होंसला के किसी के काम आ सकूं,
दे हिम्मत के दर्द बांट लु कोई ....!
या रब ..दे तौफीक़ किसी की उम्मीद बन जाऊ
जब बनु तो नउम्मीद न रहे कोई !!- saira

de hosla ke kisi ke kaam aa saku,
de himmat ke dard baant lu koi...!
ya rab de taufeeq kisi ki ummed ban jau,
jab banu to naumeed na rahe koi !!-saira

Friday, 26 September 2014

अजब नशा है ज़िन्दगी, तुझे रोज़ पीए जाते हैं 
तु हर शाम कत्ल कर के जाती है,हम रोज़ ज़िंदा हुए जाते है!!- saira
अज़ीब परिंदे हैं ये रिश्ते दिल के,
न कैद सहते हैं न आजाद रहते हैं !!-saira

Ajeeb parindey hain ye rishtey dil ke,
na qaid sehte hain na azad rehte hain !!-saira
कितना भारी है दर्द इशक़ का... के
रत्ती भर की रात हुई और तोले भर का दिन ..!!-saira
मैंने पंख बांधे है अपने पैरों से आज कल
रफ़्तार ऐ इश्क में चलने की नहीं उड़ने की ताब है !!-saira
कहाँ अब मुझ को तेरे दीदार की दरकार है
हर नज़र में नज़र तेरी है, हर चेहरे पे नुर तेरा है !!-saira
kahan ab mujh ko tare dedar ki darkar hai?
har nazar mein nazar teri hai ,har chahre pe noor tera hai !!-saira

Thursday, 25 September 2014

हर हरफ़ लिखा जाता है तेरे ख्याल से ..
लोग कहते हैं मेरा ख़याल अच्छा है.. !!

हर लम्हा बुन देते हैं तेरी ही यादों का
लोग कहते है शब्दों का जाल अच्छा है !!

लोहे दिल से लिखते हैं तेरे आने की खुशी..
कभी तेरे जाने का गम...,
लोग कहते हैं मेरा हर जज़्बात सच्चा है!!

मुस्कुरा देती हैं आँखें तेरा नाम आते ही
लोग कहते हैं सुख्न्वर का अंदाज़ अच्छा है!!

तुझ को लिखते हैं, तुझ को पढ़ते हैं,
तुझ से मोहब्बत, तुझ से ही उलझते हैं...
हमे तुझ से ही फ़ुर्सत नही
लोग कहते हैं तु मेरा इश्क़ पक्का है
मेरा प्यार का कारोबार अच्छा है !!- saira

Wednesday, 24 September 2014

ज़िंदगी तेरी मोहब्बत की क़र्ज़दारी है, 
उम्मीद ए वसल पे गुज़र बसर ज़ारी है!!!!-saira

zindgi tere mohabbat ki karzdari hai,
umeed e vasal pe guzar basar zari hai!!-saira