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Saturday, 28 February 2015

बे-जा वक़्त जाया करते हो



किसी वक़्त तो आराम लो ....बस अब यहीं ठहर जाओ
बे-जा वक़्त जाया करते हो .....ख्वाब दर ख्व़ाब , ख्याल दर ख्याल
आने जाने में !!- saira

सजदा

सजदा
मेरे सोहनेया... दिलजनीयाँ
मेरे  महीयाँ.. मैं दिल हारीयाँ
तु है मेरा , मै हु  तेरा ... मैंने खुद में तुझ को  है पा लिया
मेरे सोहनेया... दिलजनीयाँ
मेरे  महीयाँ.. मैं दिल हारीयाँ
सजदा करू ...मैं तेरा  सजदा  करू,  नाम का तेरे सजदा , इश्क का तेरे सजदा सजदा..... सजदा  करू मैं  ...मुझ में रहे तु हंसदा ......
सजदा..... सजदा  करू मैं  ...मुझ में रहे तु वसदा ......  !!
तेरे आने की है  वो ख़ुशी तेरे  जाने का नहीं कोई गम ..
तु मुझ में हैं मेरे सनम ... अब  हो गये एक जान हम ...!!
सोहनेया ......
मेरे ख्व़ाब की ताबीर  तु...मेरे हाथ के लकीर तु 
मेरे इशक की तासीर तु .... ...तु ... तु ... तु.....
 है मेरे रूबरू ... मेरे चार सु !!
 - saira





Thursday, 26 February 2015

tera aks

मैंने ख्व़ाब में भी कभी चाँद का नूर नहीं माँगा .....
न मालूम क्यूँ तेरा अक्स लेके आता है हर शाम ढलते ही !!- saira

nilaam

क्या क्या नीलाम होता है सियासत में देखलो ....
धर्म, ईमान, ज़मीर और अब लिबास भी !!- saira

khyaal

जरूरी हैं सांस अगर मेरे जीने के लिए 
तो जरूरी है तेरी महक इन फिज़ाओं में मिले !!-saira

लाख रौशनी के चराग जला ले कोई
परछइयां कभी नहीं छोडती चाहे कितना अँधेरा हो ....!! - saira
laakh roshni ke chrag jla le koi ,
parchhayian kabhi nahi chorti chahae kitna andhera ho ....!!-saira

क्या होंसला ले आता है आफ़ताब भी ..... 
रोज़ शिकश्त खाता हैं सियाह रात के अँधेरे से ..
रोज़ उगता है रोशन बाटने के वासते !!-saira

खुले दरवाज़े रखते हैं आज कल ..
एक दिल अमानत रखा था वो चोरी हो गया 
अब खोने को कुछ भी नहीं !!-saira

जब तलक दोस्त नज़र चुरा के नज़ारे न देखे ...
समझो उस की वफ़ा बाकी है ....
और जब जुबां और नज़र लडखडाए तो समझो ..
वो कुछ बदला है अब और बदल जायेगा !!-saira

अज्माय्शों का वक़्त है
फर्मयेशें न कर महबूब से..
ए दिल गुनाहे ए इश्क़ का कसूरवार है तु !!-saira
Azmaishon ka waqt hai...... Farmayeshen na kar.. Mehboob se ,
 aye dil gunah e ishq ka kasoorvar hai tu! - saira

कोई नहीं !!

कोई नहीं !!
उठ जाग मना मैनू साँभ ज़रा 
तैं की लैना खुद्गर्ज़ा दा ..!!
कोई मीत नहीँ दिलदारां दा
रिश्ता वंडेआ हर तलवरां दा...!!
न प्रीत बची न रीत बची
चुरा होंदा पया ऐत्बारां दा ..!!
हर शय दा मोल वी है कोई
एथे मोल नहीं कोई यारां दा..!!
कोई क्यों वंडे तेरे दुखड़े वे
इथे कोई नहीं गम्ख्वारा दा ,,!
तु आपे ज़ख्म ते मरहम रख
हाल पुछ दा कौन दिल दे बीमारां दा !!--saira

"जिंदगी" सिर्फ तुम्हारी है ....!!

"जिंदगी" सिर्फ तुम्हारी है ....!!
कभी कभी ज़िन्दगी एक ऐसा खाली कमरा लगने लगती है जो अपने भीतर समेटे हुए हो ...कुछ पुरानी तस्वीरें जिस में कुछ पुराने रिश्ते और अज़ीज़ लम्हें जम गए हों 
और दीवारें रिश्तों के रिसने से सीली पड़ गयी हों .... हर आवाज़ गुंजती रहती हो कभी लौट लौट के आती है अपनी ही सदा किसी अनसुनी दुआ की तरहां ..
खाली शीशा पे जमी धुल अपना ही चेहरा देखने नहीं देती !
.मकड़ी के जाले जैसे उलझा हुआ सा मन इस से बाहर नहीं आ पाता चाहे अनचाहे अटका रहता है वही जिंदगी के कोने में ...दिन रात का होना भी नहीं बदलता इस के भीतर की स्थिर हलचल को ...कोई खिड़की नहीं खुलती , कोई रोशनदान भी कोई किरण उम्मीद की अन्दर नहीं आने देता, door bell भी बजती है तो इस ख़ामोशी का शोर उसे सुनने नहीं देता ...मन के भीतर मचा शोर फ़ैल जाता है इस बंद कमरे में! कुछ नये परिंदे अपना आशियाना बनाने लगते है इस के बंद रोशनदान के कोनों में ...इस के भीतर बैठे हम सुन पाते हैं उन परिंदों का संघर्ष ... एक घोंसला बनाने का शोर , बारिश में पंख फडफडाने का शोर और फिर सुन पते हैं कुछ दिन बाद उन की जिंदगी में आई नई जिंदगी के चहचाहाने के मधुर आiवाज़ .......तब कभी लगता है उम्मीद कहीं भी पनप सकती है ...जिंदगी किसी हाल धड़क सकती है .....मगर ये कमरा जो हम खुद ही बंद कर लेते हैं
यकीन नहीं होने देता खुद पे ...खुद के वजुद पे ....और वो तब तक बंद रहता है जब तक खुद कुछ न किया जाए...जब तक किसी किरण की उम्मीद छोड़ कर एक दिया खुद न जलाया जाए...तब तक दिन नहीं होगा ...इंसान को तोड़ने में सब से बड़ा हाथ खुद उसके EMOTIONS की ही होता है ... हँसी ख़ुशी देते रहते हैं रिश्ते तो वो अपने लगते हैं और ज़रा बदले तो so called प्यार मोहब्ब्बत वफ़ा सब ख़तम लगने लगती है ....expectations स्वाभविक है और होनी भी चाहीये लेकिन हम खुद से उम्मीद करना भुल जाते हैं जब तब तकलीफ़ होती है जब खुद से जयादा अपने आस पास के लोगों और रिश्तों पे Depend होने लगते हैं तब हम गलने लगते हैं .... बंद कमरे की feeling जब कभी होने लगे तो खद को खुला छोड़ दो मन के भीतर के सब खिड़की दरवाज़े खोल दो ...मन बड़ा करो और माफ़ कर दो सब को और खुद को भी ..खुद की खातिर ... खुदा की नेहमत "जिंदगी" की खातिर जो सिर्फ तुम्हारी है .... जीते रहो जीना जरूरी है वजह तलाशते रहो क्यूँ की तुम्हारे होने का मतलब याद रहना जरूरी है !! - saira

Sunday, 15 February 2015

कल तक का सफ़र

आज से कल तक का सफ़र बड़ा लंबा था ..
मैंने अर्श को फ़र्श और फ़र्श को गर्क होते देखा ..
आज से कल तक का सफ़र भी जाने क्या होगा ???
कहाँ जमीं कहाँ आसमां होगा ...
मेरा जो कुछ भी है आज न जाने कल कहाँ होगा ??
मैंने आज से कल तक का सफ़र जो देखा है .....
चंद लम्हों में जनत से जहनुम का सफ़र देखा है
मेरे होने न होने की वजह कुछ भी नहीं
मैंने इन पलों में क़ुदरत का असर देखा है !!- saira

Sunday, 1 February 2015

इलेक्शन मुबारक!!

इलेक्शन मुबारक!!
बोल न दिल्ली क्या कहना है?? 
इस बार भी क्या ये सब सहना है??
खीचां तानी कुर्सी की, वही कहानी कुर्सी की? 
कौन है नैतिक कौन अनैतिक... 
कौन आम कौन खास.....बना हैं.. 
जन जन की कौन सुनेगा...
घर का राशन सस्ता कौन भरेगा....
क्या देख के? चुनेगी किस को..?
बोल न दिल्ली दिल की सुनेगी....
या फिर विज्ञापनों से ही नेता चुनेगी नेता ,
बोल न दिल्ली क्या कहना है..??..... 
किस को सत्ता GIFT करोगी , वो जो इसको हिंदू राष्ट्र करेंगे??
या Rape को छोटा काम कहेंगें?? !! 
बोल न दिल्ली किसे चुनेगी वो जो एक को घेर लड़ेंगे .??
...या कोई नया काम करेंगें ??
.....बोल न दिल्ली क्या कहना है???इलेक्शन मुबारक......!!-saira