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Thursday, 22 October 2015

या रब

तेरी हर तहरीर बदलती है नजरिया मेरा .....
कभी तु इश्क़ लगता है, कभी खला कोई,
कभी सब कुछ .....कभी कमी कोई
कभी आशिक, कभी महबुब....
कभी यु ही बस जागता सा वहम कोई...
या रब ये माज़रा क्या है?? !!!-saira

mkaan

मकान बडी चीज़ है...
लोग कहाँ घर बनाते हैं आज कल 
घर दिलों से बनते है
लोग कहाँ दिल लगाते हैं आज कल !!-©saira

अच्छा बुरा कुछ नही होता!!

अच्छा बुरा कुछ नही होता!!
अच्छा बुरा कुछ नही होता ,
तेरा मेरा भी कुछ नही .
जो है, जो होगा सब... दुनियादारी है ..
लोगों को अपना करना , और उनका होते रहना
इन्सान की ला इलाज़ बीमारी है ...
प्यार पा लेना प्यार दे देना ...
रूठना और माना लेना ,
खुदा ने सब को सिखाया है ....
रिश्ते बनाना और फिर निभा जाना
इन्सानी कालाकरी है !
हक़ होना और हक़ जाताना ,
छीनना और पा जाना..
जो भी इच्छा हो ,
एक अदा ही तो है जो हम सब ने खुद में उतारी है
कभी देखा है खुद को आइने मे....??
हम दिन भर में कितने चेहरे बदलते हैं???
हर रिश्ते , हर वक़्त को हम हर पल नय चेहरा में मिलते हैं
कभी कभी वो कर जाते हैं ..जो हमने सीखा ही नही ?
जो आता ही नही था
और तब मिलता है हमारा वो हिस्सा ,
वो रूप जो किसी ने नही देखा ..
अच्छा बुरा कुछ नही होता सब समझ हमारी है ..
चाहो तो रूठ जाओ सारे जमाने से अपने गम के बाद
चाहो तो सारी दुनिया तुम्हारी है ...
यकीन जानो एक रत्ती हँसी,
एक टुकड़ा खुशी.... तुम्हारे सौ ग़म पे भारी है ..
माना के कुछ ग़म भुला नही करते ..लकिन चलते रहना
ही तो दुनियादारी है !!-saira©

तुम !!

तुम !!
कभी इशक़ तु, कभी अश्क तु!
कभी दर्द तु, कभी मर्ज़ तु!
और मैं कभी अर्श पे, कभी फर्श पे!
कभी घर मेरा , कभी राह तु ! 
मेरी चाहत और राहत भी तु !
और दिल घुमता है तेरे चार सु!
कभी कोई गिला ..या इबादत का सिला ..!
कभी आस और कभी प्यास तु !
कभी आईना कभी अक्स तु
कभी तु रूबरू ,कभी मैं भी तु !
मेरा नाम भी निशान भी तु
कभी दिल हु मैं कभी जान तु
मैं कुछ नही तेरे बिना ,
मेरा कोई नही तेरे सिवा
"मोहब्बत " !!-saira©

shbd

दिन भर तलाश ए स्कुं में गुम रहा सारा शहर,,,,
रात भी बेचैनीयाँ ही ले के लौटी है
कौन क्हता नींद से आराम मिलता
हाँ दुआओ का सिला ज़रूर मिलता है
तो सुनो.... दुआओं में मुझे बस याद रखना तुम!!saira©

यहाँ अपना पराया कोई नहीं
बस मकसद के रिश्ते नाते हैं
सब खुद से लड़ते रहते है
उल्फत का दीवाना कोई नहीं!!- saira

मेरी नज़्म की नाब्ज जाने क्युँ बैठी जाती है,
तेरा ज़िक्रि आता है तो दुनिया उलझ सी जाती है,
के मेरे किस्सों में शामिल है तु आजकल,
देख उल्फत क्या रंग लाती है,
मेरी बदनामी रोज़ बड़ती जाती है!!-saira©

गुज़ारिशें बे हिसाब सुन के आयी है,
ये शब ए मिराज़ कितना बन संवर के आई है!
कितना हसीन चाँद लेके आई है
ये नेहमत ए इबादत आज ईद बन के आई है!!-saira©
guzarishen be hisaab sun ke aayi hai,
yeah e miraz kitna ban savar ke aayi hai,
Kitna haseen chaand leke aayi hai,
ye nehmat e ibadat aaj eid ban ke aayi hai!!-saira©

बडा इतरा के बरसा है सावन ये आज तो...
गौर से देख किस हसीन का काजल घुला है बादल में !!!-saira©


.


july 2015

उस के शाने पे सर रख के कोई ख्व़ाब सोया भी नही ,
दिल उसकी पनाह में अभी खोया भी नही ,
अज़ीब बात फिर भी सकूं है ...
मैंने ठीक से उसे पाया नही और पुरा खोया भी नही -saira-© 

मेरे सवारने के वास्ते !

चंद फुल गुलाब के ,
चंद अल्फाज़ मेरे जानिब किसी 
शायर की किताब के ,
चंद मीठे बेर किसी पुराने बाग़ के ,
और आसमान में कुछ सितारे,
मेरे और तुम्हारे नाम के
चाँद मेरा चेहरा ....
और मुलाकत किसी जनत के ख़्वाब में
यही काफी है जीने के वास्ते ..
कहाँ खोजते फिरते हो दौलतो - शोहरत
ख़ुश रहने के रास्ते.....
ये सजने सवरने की बे जः कोशिशें
तेरी आँखों के आइने बहुत हैं
मेरे सवारने के वास्ते !!!-saira©
जाती हु जाने तो दो ,
लौट आऊँगी
वक़्त के माफ़िक बे ईमान नही हु -saira

july2015

तु जहाँ कहीं भी है जान ओ दिल सब वहीं पे रहता है ,
तु मुझ से जुदा है ??.....कौन कहता है ?!!saira©

इस कदर बदला इस शहर ने मुझे,
के पथर रख दिया है जहाँ कभी दिल धडकता था!-saira©
Iss kdr bdla ıss sehar ne mujhe,ke patharr rakh deya haı jahana kabhı dıl dhadkta thaa!!


गुलज़ार ख्वाब था

कल का ख्वाब गुलज़ार ख्वाब था
कल रात का ख्वाब तुम्हारा ख्वाब
दिया जला रहे थे तेज़ हवा मे तुम
मुझे देख के तुम मुस्काये ,पास बुलाये
और कुछ कच्चे बेर खिलयए....
भीनी सी मुस्कान तुम्हारी ...
गुनगुनाता हुआ चाँदनी का दोशला
पेहने मेरे साथ चले जा रहे थे
लहरों के शोर में भी तुम कुछ कहे जा रहे थे
हम दोनो लहरों के किनारे चाँद की मधम
रोशनी में शायद सितारे गिने चले जा रहे थे
और कभी लगा मुझे तुम कोई गीत बुने जा रहे थे
सारी रात महकी हैं आंखे तुम चंदन से बहे जा रहे थे.....
कल ख्वाब गुलज़ार ख्वाब था
काश हक़ीकत हो जाए
मेरी तुम से मिलने का अरमान भी पुरा हो जाए!!-saira©

aah

कुछ लोग कभी कभी बहुत ज़्यादा इन्सान होते हैं
मेरा य्कीन है वो खुदा के कुछ खास होते हैं !-saira©

दिल से दिल तक राह हुआ करती है,
ये भी एक खुबसुरत वहम हुआ करता है !!-saira

वो तक़दीर के हाथ का खिलौना निकला .....
मैं जिस के सहारे ज़िन्दगी का जुआ खेलने निकला !!- saira


बडा इतरा के गुज़री है ज़िन्द्गी
मेरे क़रीब से
और मैं समझा कोई अजनबी रहा होगा...!!-saira©


dua ke phool

दुआ के फुल रख के मेरे हाथ में
उसने कहा मैं फिर आऊँगा....
वो शख्ष कोई.मौसम था बहार का
न जाने क्युं आज तक नही लौटा!! - saira©
Dua ke phool rakh ke mere haath mein usne kaha main.phir aaunga
vo shakash koi mausam tha bahaar ka na jane kyun aaj tak nahi lauta !!- saira

खुदा सिर्फ मोहब्बत है

वो हर बशर में शामिल है 
ये दुनिया नुर है उसका 
कोई शक्ल नही रखता
और न कोई रंग है उसका 
वो दिल में य्कीन सा कायम
और l लहु सा हम में बह्ता है
वो किसी मंदिर या मस्जिद में
भी कहाँ रहता है ?
खुदा सिर्फ मोहब्बत है
और बस दिलों में रहता है
मैं तेरा हु, तुझे में हु,
तेरी ही खातिर हु
खुदा अपने बन्दों से क्हता है
मेरे घर की तामीर रहने दो
मुझे बाहर नही खुद में ही रहने दो !!
मुझे खुश करना है तो अमन ओ स्कुन रहने दो
सब रंग मेरे हैं तुम भगवा,हरा,सफ़ेद रहने दो .....!!!-saira©

aug2015

किस को आदत है ....मुस्कुराने की ..
ये भी एक अदा है गम छुपाने की ..
किसी को असर नही, किसी को कहाँ लगी ??
हाल पुछ लेना बस आदत सी है जमाने की !!-saira©

Kis ki tarafdari karu?
aur kiski temaardari?
dildari aur duniyadari ....dono la ilaaj hain!!-saira©
किसकी तरफदारी करूं?
और किसकी तीमारदारी .?
दिलदारी और दुनियादारी ...दोनों ला-इलाज़ हैं !!-saira©


जब कभी किसी अपने की ज़रूरत लगने लगे.....
तो समझ जाओ के तुम अरसे से तन्हा ही
हो ...और अब खुशी और राहत खरीदी नही जा सकती!!-saira©


दर्द की हद नही हुआ करती ये हमेशा अपार होता है 
कोई कितनी तवज्जो देता है, 
खुद पे कितना तरस खाता है 
महज़ यही पैमाना है दर्द के होने का !!
यही तय करता है इंसान का किसी के लिय हँसने रोने का !!-saira


क्युँ तु रोज़ मिलता है ??
और मिल के बिछ्ड़ जाता है ....
एक बार क़्त्ल कर दे
रोज़ मरने में मेरा वक़्त बहुत जाता है!!saira ©

आज़ादी मुबारक !!

आज़ादी मुबारक !!
बस अब सम्भाल लो आज़ादी 
फिर से गुलाम हुए तो
भगत सिंह,राज्गुरू,सुख्देव,
शायद दोबारा जन्म न लें!!
जय हिंद!!

वक़्त

aitbaar kiska hai iss jhann mein...
saya bhee kad badalta hai roh chalte huye - saira ©
एतबार किस का इस जहान में,
साया भी कद बदलता है रह चलते हुये!- saira ©

वक़्त को बाँध के पहरों में रख दिया मैने
और वक़्त ने ज़िन्द्गी पे पहरे लगा दिए.....
गज़ब शय निकली वक़्त भी देखो
क्या राजा ?क्या रंक? पल भर में सब ही
नचा दीए..!!-saira©

Gulzar ke naam

वो हर फुल और सितारा इतराता है
चाँद भी अजब अदा में नज़र आता है
जिस रोज़ गुलज़ार उन के जनिब कुछ क्ह के गुज़र जाता है 
वक़्त पहरों अर्सो तक उसी को गुनगुनाता है -saira©

तुम्हारी कलम के छीटें सितारे बन गए हैं,तुम्हारा चाँद सा ख्याल है जिस में मैं ख्वाब बुन्ती हुं!
गुलज़ार तुम्हारे सदके मैंभी कुछ अरमान चुनती हुँ ,
तुम ता उम्र क्हते रहना मैं सुनती हुँ-saira©

सफ़र

मैं ता उम्र का सफ़र तय कर तो लु तन्हा लेकिन..
योम ए क्यामत भी तु बा पर्दा रहा तो कहाँ जाऊँगा??!!-saira© 
Main ta umar ka safar tay kar to lu tanha lakin..
Yaum e qayamat bhi tu ba parde rahaa to kahaa jaunga !"-saira©
चार पैसे हो तो सब अयब छुपा लेते हैं 
ये चाँदी के सिक्के, जब कामयाब हो जाओ तो दुनिया भुला देती है तुम्हारी बदनामी के क़िस्से !!-saira©

तु सुफी

तु सुफी तेरा रंग सुफी और सुफी का रंग कोई नही 
तुझ में रब ,रब में भी तु ही सुफी तेरा रूप रंग भी कोई नही
सुफी तु एक रूह वफ़ा की 
सब तुझ में कुछ बाहर नाही 
सुफी तुमरे शवाश चलु मैं
अंग संग तोरा रूप रंग मैं
भीतर तोहरे मैं बाहर नाही!!-saira©

दीवानगी

दीवानगी की हद है कोई ?
इश्क वालों से पूछो उन की दवा भी है कोई ??
कौन सी शब, कौन सा दिन,
ग़म या खुशी आखिर कब ये कमभखत
आँख नही रोई....?
दीवानगी की हद भी है कोई ???!!-saira©


दीवानगी कोई मर्ज है शर्तीया
इलाज ई इशक नही हुआ करता 
लोग कहते हैं प्यार में मर जाओगे
कोई समझाओ इन्हे अशिक नही मरा करता 
इश्क और अशिकों का वक़्त नही ठहरा करता
!-saira©

dard ke phool

दर्द के फुल भी खिलते है बिखर जाते हैं ,
ज़्ख्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं ...
उस द्रीचे में अब कोई हमारी राह तकता नही,
वहाँ से सर झुकाए हुए हम चुपचाप गुज़र जाते हैं...!!-saira©
Dard ke phool bhi khilte hai bikhar jaate hai,
ZaKhm kaise bhi ho kuch roz mein bhar jaate hai!!
Us dariche mein koi hamari rah takta nahi
vahaa se Sar jhukaye huye hum chup chaap guzar jaate hai!!-saira©
मेरी खमोश आंखों में बोलता है अब्र ए इश्क है शायद 
बडा शोर रहता है जब ये पानी 
बरसता है !!-saira©
कोह ए दिल से दुआ आती है तेरे स्कुन के वास्ते..
खुदा मेह्फूज और आसान रखे सब तेरे रासते ...आमीन !!-saira©

मैने धूप पहनी है आज और शाम का काजल लगाए हू 
चाँद का कंगन सजा के बैठी हू ...
अब तेरी आंख से छलकु तो इश्क बनु!!-saira©
Maine dhop pehni hai aaj aur shaam ka kajal lgaya hu,,
chand ka kangan saja ke baithi hu u...ab teri aankh se chalku toh ISHQ bnu.!! - saira©

बडा दर्दनाक है ये दिमाग के अंदर का अँधेरा लेकिन ....दिल है के जल जल के उजाला किये जाता है ... !!-saira©


ना तु ,ना मैं!!

ना तु ,ना मैं!!
गलतियों से जुदा
तु भी नहीं मैं भी नहीं.
दोनों इंसान हैं 
ख़ुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं!!.
तु मुझे और मैं तुझे
इल्ज़ाम देते हैं मगर अपने अंदर झांकता
तु भी नहीं मैं भी नहीं.!!
गलतफहमियों ने पैदा कर दीं दिलों में दुरीयाँ
वरना फितरतन तो बुरा
तु भी नहीं मैं भी नहीं!
आज भी अधुरे हैं हम
उस खुदा के सामने...
बडा नफ़्स शामिल है
इस इन्सान होने में !
तंगदिली से उपर उठा
तु भी नही मैं भी नही
!! - saira©

sept2015

रंग ,महक और रोनकें बन के बैठे हैं 
तेरे अरमान मेरे ख्वाब बन के बैठे है!-saira©

बेशाक़ हर एक किरदार की उमर तय हुआ करती है,
फिर भी ..चाहते हैं हर रिश्ता है
हम ता उमर को और फिर उसके भी बाद भी !! - saira ©' 

रोज़ एहसास दिलाया जाता है गरीब को उसकी लाचारी का 
फिर भी नवाब जैसा ही पेश आता है 
रोज़ जताती है दुनिया के कोई बोझ हो तुम
ज़िन्द्गी है के फिर भी ज़िद्द में जीये जाती है !!-saira©

रात के कितने पहर हैं क्या जाने
तेरे इंतज़ार में मैने तारे हज़ार बार गिने!- saira©

मज्लिस ए सीयासत में शराफत से कुछ नही कर पाओगे !!
इस में तो बस गिर जाओ ज़्मीर से ,
के जितना नीचे जाओगे उतना ही उपर आओगे!!-saira©

हाथ छूटने से दिल के होसलें नही टूटा करते....
रिश्ते रूठ जाने से मुक़द्दर फुटा नही करते !!- saira

oct 2015

बहुत बढ गया है नफ़्स ए मोहब्बत मेरा
दुआओं में कोई शामिल नही तेरे सिवा !
मेरा बस राबता भी म्हज़ तुझ से है 
और दुनिया से कोई शिक्वा ना गिला !!-saira©

चंद फुलों की चाहत में 
तमाम उमर मिट्टी से लिपटा रहा वो बागबाँ
फुल खिले तो तक़दीर
में मज़ार,मन्दिर,गिरज़ा और सेज़ लेके आए हैं !!-saira©

कल से कल तक के सफ़र में 
ही ज़िन्द्गी तमाम होनी है 
कल क्या बीता खबर रहती है 
कल क्या होना है ??वो खुद के बस की बात होती है !!-saira©

खुद्गरज़ी गुनाह नही बे शक 
सब से पह्ले खुद का सोचा तो कहर क्युं बरपा !!-saira©

बड़ा आराम है मुफ़लिसी में आज कल
के कुछ खोने का डर नही 
मेरा युं भी यहां तो कुछ नहीं 
देख गरीबी मे कॉई फ़िक्र नही!!- saira ©

गुम्शुदा हुँ मैं ...लोग कहते हैं 
वो नही जानते मुझे मिल गया कोई !-saira©
gumshuda hu main ...log kehte hain
Vo nahi jante mujhe mil gya koi !-saira©

क्या क्या बदल रहा है 
कभी रंगत,कभी चेहरा
और कभी फितरत जाहान की!!-saira©

जाने दो

जो गुज़र गया उसे जाने दो... 
नई पीढ़ी को आगे आने.दो...
नया करो जो हुआ नहीं नहीं...
नया भारत जगमगाने दो, 
संसार में फिर से सोने की चीडिया कहलाने दो...
क्या पाया ?क्या खोया ?कल की बातें हैं.... जो गुज़र गया सो जाने दो....
मत बांटो जनता टुकड़ों में इसे एक ही कौम कहलाने.....!
बहुत हुआ है सब ने ही सहा है
अब सब को एक जान हो जाने दो!! --saira©

जगह्साई!!

जगह्साई!!
मेहमान अब भगवान नही है 
कोई कलम अबआज़ाद नही है 
कोई दलित अबबचने न पाये
देखो कोई अब दाल तक न खाए
हिंद के वारिस अब केवल हिंदू
मुसलमान अब घर अपने जाए
जितने धर्म हों अब उतने दंगे
फिर्कोँ में हम को अब बाँटा जाए
लुट लो खुद हीअब चैन अमन तुम
काहे कोई बाहर से आए??
जात पे काटो अब रंग पे बाँटो
आग लगा दो वतन को सारे
याद रहे ओ सत्ता वालो अब
बस कुर्सी न ये जलने पाए
देश को देदो दिशा नई तुम
दुख दिल से न जाने पाए
फिर भी एक निवेदन तुम से
रोक सको तो रोको ये मनचन
बंद करो अब विश का लंगर
गरिमा भंग न होने पाए
जगह्साई न होने पाए!!-saira©