तेरी हर तहरीर बदलती है नजरिया मेरा .....
कभी तु इश्क़ लगता है, कभी खला कोई,
कभी सब कुछ .....कभी कमी कोई
कभी आशिक, कभी महबुब....
कभी यु ही बस जागता सा वहम कोई...
या रब ये माज़रा क्या है?? !!!-saira
कभी तु इश्क़ लगता है, कभी खला कोई,
कभी सब कुछ .....कभी कमी कोई
कभी आशिक, कभी महबुब....
कभी यु ही बस जागता सा वहम कोई...
या रब ये माज़रा क्या है?? !!!-saira
