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Thursday, 22 October 2015

खुदा सिर्फ मोहब्बत है

वो हर बशर में शामिल है 
ये दुनिया नुर है उसका 
कोई शक्ल नही रखता
और न कोई रंग है उसका 
वो दिल में य्कीन सा कायम
और l लहु सा हम में बह्ता है
वो किसी मंदिर या मस्जिद में
भी कहाँ रहता है ?
खुदा सिर्फ मोहब्बत है
और बस दिलों में रहता है
मैं तेरा हु, तुझे में हु,
तेरी ही खातिर हु
खुदा अपने बन्दों से क्हता है
मेरे घर की तामीर रहने दो
मुझे बाहर नही खुद में ही रहने दो !!
मुझे खुश करना है तो अमन ओ स्कुन रहने दो
सब रंग मेरे हैं तुम भगवा,हरा,सफ़ेद रहने दो .....!!!-saira©

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