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Thursday, 22 October 2015

मेरे सवारने के वास्ते !

चंद फुल गुलाब के ,
चंद अल्फाज़ मेरे जानिब किसी 
शायर की किताब के ,
चंद मीठे बेर किसी पुराने बाग़ के ,
और आसमान में कुछ सितारे,
मेरे और तुम्हारे नाम के
चाँद मेरा चेहरा ....
और मुलाकत किसी जनत के ख़्वाब में
यही काफी है जीने के वास्ते ..
कहाँ खोजते फिरते हो दौलतो - शोहरत
ख़ुश रहने के रास्ते.....
ये सजने सवरने की बे जः कोशिशें
तेरी आँखों के आइने बहुत हैं
मेरे सवारने के वास्ते !!!-saira©

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