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Thursday, 22 October 2015

aug2015

किस को आदत है ....मुस्कुराने की ..
ये भी एक अदा है गम छुपाने की ..
किसी को असर नही, किसी को कहाँ लगी ??
हाल पुछ लेना बस आदत सी है जमाने की !!-saira©

Kis ki tarafdari karu?
aur kiski temaardari?
dildari aur duniyadari ....dono la ilaaj hain!!-saira©
किसकी तरफदारी करूं?
और किसकी तीमारदारी .?
दिलदारी और दुनियादारी ...दोनों ला-इलाज़ हैं !!-saira©


जब कभी किसी अपने की ज़रूरत लगने लगे.....
तो समझ जाओ के तुम अरसे से तन्हा ही
हो ...और अब खुशी और राहत खरीदी नही जा सकती!!-saira©


दर्द की हद नही हुआ करती ये हमेशा अपार होता है 
कोई कितनी तवज्जो देता है, 
खुद पे कितना तरस खाता है 
महज़ यही पैमाना है दर्द के होने का !!
यही तय करता है इंसान का किसी के लिय हँसने रोने का !!-saira


क्युँ तु रोज़ मिलता है ??
और मिल के बिछ्ड़ जाता है ....
एक बार क़्त्ल कर दे
रोज़ मरने में मेरा वक़्त बहुत जाता है!!saira ©

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