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Thursday, 22 October 2015

sept2015

रंग ,महक और रोनकें बन के बैठे हैं 
तेरे अरमान मेरे ख्वाब बन के बैठे है!-saira©

बेशाक़ हर एक किरदार की उमर तय हुआ करती है,
फिर भी ..चाहते हैं हर रिश्ता है
हम ता उमर को और फिर उसके भी बाद भी !! - saira ©' 

रोज़ एहसास दिलाया जाता है गरीब को उसकी लाचारी का 
फिर भी नवाब जैसा ही पेश आता है 
रोज़ जताती है दुनिया के कोई बोझ हो तुम
ज़िन्द्गी है के फिर भी ज़िद्द में जीये जाती है !!-saira©

रात के कितने पहर हैं क्या जाने
तेरे इंतज़ार में मैने तारे हज़ार बार गिने!- saira©

मज्लिस ए सीयासत में शराफत से कुछ नही कर पाओगे !!
इस में तो बस गिर जाओ ज़्मीर से ,
के जितना नीचे जाओगे उतना ही उपर आओगे!!-saira©

हाथ छूटने से दिल के होसलें नही टूटा करते....
रिश्ते रूठ जाने से मुक़द्दर फुटा नही करते !!- saira

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