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Thursday, 22 October 2015

Gulzar ke naam

वो हर फुल और सितारा इतराता है
चाँद भी अजब अदा में नज़र आता है
जिस रोज़ गुलज़ार उन के जनिब कुछ क्ह के गुज़र जाता है 
वक़्त पहरों अर्सो तक उसी को गुनगुनाता है -saira©

तुम्हारी कलम के छीटें सितारे बन गए हैं,तुम्हारा चाँद सा ख्याल है जिस में मैं ख्वाब बुन्ती हुं!
गुलज़ार तुम्हारे सदके मैंभी कुछ अरमान चुनती हुँ ,
तुम ता उम्र क्हते रहना मैं सुनती हुँ-saira©

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