वो हर फुल और सितारा इतराता है
चाँद भी अजब अदा में नज़र आता है
जिस रोज़ गुलज़ार उन के जनिब कुछ क्ह के गुज़र जाता है
वक़्त पहरों अर्सो तक उसी को गुनगुनाता है -saira©
तुम्हारी कलम के छीटें सितारे बन गए हैं,तुम्हारा चाँद सा ख्याल है जिस में मैं ख्वाब बुन्ती हुं!
गुलज़ार तुम्हारे सदके मैंभी कुछ अरमान चुनती हुँ ,
तुम ता उम्र क्हते रहना मैं सुनती हुँ-saira©
चाँद भी अजब अदा में नज़र आता है
जिस रोज़ गुलज़ार उन के जनिब कुछ क्ह के गुज़र जाता है
वक़्त पहरों अर्सो तक उसी को गुनगुनाता है -saira©
तुम्हारी कलम के छीटें सितारे बन गए हैं,तुम्हारा चाँद सा ख्याल है जिस में मैं ख्वाब बुन्ती हुं!
गुलज़ार तुम्हारे सदके मैंभी कुछ अरमान चुनती हुँ ,
तुम ता उम्र क्हते रहना मैं सुनती हुँ-saira©

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