Powered By Blogger

Thursday, 16 June 2016

Rehta ek sa kuch bhi nahi

क्या कहु? क्या  लिखुं?
कुछ कोई सुनता ,पढ़ता ही नहीं!

कया मांगूं? क्या फरियाद करू ?
खुदा को भी  अब फुर्सत नहीं !

क्या दे दूँ? क्या ज़ब्त करू?
मेरा काम का अब कुछ भी नहीं !

क्या जीतुं? क्या  हारू?
रहना तो यहाँ  कुछ भी नहीं !!

क्या यकीन ?क्या बे ऐतबारी ?
एक सा रहता कुछ भी  नहीं !!
-saira (c)

No comments:

Post a Comment