कुछ कहने सुनने की कोई व्हज़ नही रहती,
ईश्क मुकमल हो जाए तो दुनिया चुप नहीं रहती !!
कोई कुछ न क्हे अपनी जुबानी ,
लहु बन जाती है मोहब्बत रगों में बहती रहती है !!
न जाने क्या मिज़ाज है दिल के मारों का,
मोहब्बत कतल भी कर दे तो हसरत ज़िन्दा रहती हैं !!
तालाश में रहते हैं फरिश्ते ईश्क में मरने वालों का,
सुना हैं ईश्क ही रब हैं ईबादत ज़िन्दा रहती हैं !!
कहां दरकार मिलने की अब क़यामत के रोज़ की
वो नज़र मिलती रहती है क्यामत रोज़ रहती है !!-saira ©

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