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Thursday, 22 January 2015

याद

सारे शहर में तेरी यादों का मेला है रात दिन 
फिर भी सरे मेला मेरा दिल अकेला क्यूँ है ?- saira

कौन बाकि है ??

नीयत ओ ईमान वाला कौन बाकि है ?? 
सब सियासत है...." रब " को मनाने की ,,,,,, ....
क्या रोज़ा !क्या बंदगी!क्या पुजा !क्या पाठ !!!saira

रहबर

एक ही रहबर है, कभी आज़मओ तो सही,
हर ख़्वाब की ताबीर है,
दुआ में हाथ उठाओ तो सही -saira

Thursday, 15 January 2015

ishq di jageer/ इश्क दी ज़ागीर

आसमान सिर ते चुकीं फिर दे हाँ 
इश्क़ विच दुनिया भुलाई फिर दे हाँ 
 चंन.तैनु महबूब ते,
तारएँ  नु अरमान बनाए फिर दे हाँ 
हथआं दियां लकीरान विच तेरी 
तस्वीर बनाए फीरदेआन ..फिर दे हाँ .
बे- नसीबी नू नसीब बनाई फिर दे हाँ .
हिज्र नु तक़दीर बनाई फिर दे हाँ 
असी ज़मीन, फलक, स्मुंदर , हवा, पाणी विच
अपनी जागीर  बनाई फिर दे हाँ  !!-  saira

asman sir te chiuki  firde haa..
ishq  wich  duniya bhulayee firdean...
chn tanu mehboob te,
 sitarean tu armaan bnaye firdean..!!
hathan deyan lkeeran wich teri 
tasveer bnaye firdeaan ....
be- naseebi nu naseeb bnayee firdean,
hizar nu taqdeer bnaye firdean,
asi zameen, falak, smundar , hawa, pani wich
apni jageer bnaye firdean !!- saira 

 ਅਸਮਾਨ ਸਿਰ ਤੇ ਚੂਕੀ ਫਿਰਦੇ ਆ ,
ਇਸਕ  ਵਿਚ ਦੁਨਿਯਾਂ ਭੂਲਾਯੀ ਆ,
ਚਨ ਤੈਨੂ ਮਹਬੂਬ ,ਤੇ 
ਸਿਤਾਰੇਆਂ  ਨੂ ਅਰਮਾਨ ਬਨਾਯੀ ਫਿਰਦੇ ਆ 
ਹਥਾਂ ਦਿਯਾਂ  ਲਕੀਰਾਂ  ਵਿਚ ਤੇਰੀ ,
ਤਸਵੀਰ  ਬਨਾਯੀ ਫਿਰਦੇ ਆਂ!!
ਬੇ ਨਸੀਬੀ ਨੂ ਨਸੀਬ ਬਨਾਯੀ ਫਿਰਦੇ ਆਂ
ਹਿਜਰ ਨੂ ਤਕ਼ਦੀਰ ਬਨਾਯੀ  ਫਿਰਦੇ ਆਂ
ਅਸੀਂ ਜ਼ਮੀਨ, ਫ਼ਲਕ, ਸਮੁੰਦਰ , ਹਵਾ ,  ਪਾਣੀ ਵਿਚ 
ਆਪਣੀ ਜ਼ਗੀਰ ਬਨਾਯੀ ਫਿਰਦੇ ਆਂ !- saira

Wednesday, 14 January 2015

namazan ishk diyan

ਕਿਨੀ ਵਾਰ ਕਜ਼ਾ ਨਮਾਜ਼ਾਂ ਪੜਨੇ ਨੁੰ  ਜਾਵਾਂ ਤੇਰੇ ਇਸ਼ਕ ਦੀਆਂ ...
ਇਕੋ  ਵਾਰ ਬੁਲਾ ਲੈ ਮੌਲਾ ....ਮੈਂ ਜਿੰਦਗੀ ਜੀਣ ਨੂ ਮਰਦੀਆਂ !!-Saira

kini var kza namazan padgne nu javan tere ishq deyan??
eko var bula le maula ...main jindgi jeen nu mardeyan..!!- saira

Monday, 12 January 2015

kuch ....

मुस्कुराहटें हर  दफ़ा खुशी का बयाँ नही होती..
कुछ मुस्कुराहटें महज़ ज़िन्दगी पे तंज़ करती है!!-saira
(tanz/ तंज़ = कटाक्ष / satire)

कभी सर से पैर तक,रूह से ईमान तक ,बदल जाते हैं लोग इश्क़ में 
और कभी टस से म्स नही होते ....ये जिद्द भी अज़ब बीमारी है ! -saira

ये जो दीवार बना के बैठे हो अपने आस पास ..
इन दीवारों से घर नहीं बना करते ...
कुछ रिश्तों का आसरा लो तो कोई बात बने !!-saira

जाने क्या क्या ? देखते हैं लोग दोस्ती से पहले .....
कुछ नफ़ा,नुक्सान देखते हैं कुछ चहेरे और ज़ुबान देखते हैं ,
कुल मिला कर लोग ज्यादा कुछ नहीं महज़ एक कामयाब इंसान देखते हैं !!



फिर से तनहा हूँ
रात हो गयी और दिया भी बुझ गया है
ता उम्र को शायद !! - saira

कोहराम मचा रखा है मेरी सर्द आहों ने ....
तेरे दिल का मौसम है जो बदलने का नाम नहीं लेता
- saira
तलवार पे रखा है दिल और जिगर 
जब से मोहबत की है ....
देखें ख़ुदकुशी करने की आदत से कौन बाज आएगा ??- saira

कौन कौन सा हिस्सा रफ़ू करूँ 
ज़िन्दगी के लिबास का ??
कभी ज़ेब सिलता है तो , 
कभी गरेबान फटने लगता है!!-saira

Saturday, 3 January 2015

रफ़ू

कौन  कौन सा हिस्सा  रफ़ू करूँ
ज़िन्दगी के लिबास का ??
कभी ज़ेब सिलता है तो  ,
कभी गरेबान फटने लगता है!!-saira