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Friday, 27 November 2015

rishtey

बड़ी दरारें हैं घर कीदीवारों में,
मुरम्त बाकी हैं कुछ रिश्तोंकी यक़ीनन!!-saira©

nov2015

एक मुहिम अपने दिल में चलने वाली हु .... 
टूटे ख्वाबों, उमीदों का और जलन का मलबा हटाने वाली हु...
.मै आज से, अब से फिर से सवरने वाली हूँ !!- saira©

Thursday, 22 October 2015

या रब

तेरी हर तहरीर बदलती है नजरिया मेरा .....
कभी तु इश्क़ लगता है, कभी खला कोई,
कभी सब कुछ .....कभी कमी कोई
कभी आशिक, कभी महबुब....
कभी यु ही बस जागता सा वहम कोई...
या रब ये माज़रा क्या है?? !!!-saira

mkaan

मकान बडी चीज़ है...
लोग कहाँ घर बनाते हैं आज कल 
घर दिलों से बनते है
लोग कहाँ दिल लगाते हैं आज कल !!-©saira

अच्छा बुरा कुछ नही होता!!

अच्छा बुरा कुछ नही होता!!
अच्छा बुरा कुछ नही होता ,
तेरा मेरा भी कुछ नही .
जो है, जो होगा सब... दुनियादारी है ..
लोगों को अपना करना , और उनका होते रहना
इन्सान की ला इलाज़ बीमारी है ...
प्यार पा लेना प्यार दे देना ...
रूठना और माना लेना ,
खुदा ने सब को सिखाया है ....
रिश्ते बनाना और फिर निभा जाना
इन्सानी कालाकरी है !
हक़ होना और हक़ जाताना ,
छीनना और पा जाना..
जो भी इच्छा हो ,
एक अदा ही तो है जो हम सब ने खुद में उतारी है
कभी देखा है खुद को आइने मे....??
हम दिन भर में कितने चेहरे बदलते हैं???
हर रिश्ते , हर वक़्त को हम हर पल नय चेहरा में मिलते हैं
कभी कभी वो कर जाते हैं ..जो हमने सीखा ही नही ?
जो आता ही नही था
और तब मिलता है हमारा वो हिस्सा ,
वो रूप जो किसी ने नही देखा ..
अच्छा बुरा कुछ नही होता सब समझ हमारी है ..
चाहो तो रूठ जाओ सारे जमाने से अपने गम के बाद
चाहो तो सारी दुनिया तुम्हारी है ...
यकीन जानो एक रत्ती हँसी,
एक टुकड़ा खुशी.... तुम्हारे सौ ग़म पे भारी है ..
माना के कुछ ग़म भुला नही करते ..लकिन चलते रहना
ही तो दुनियादारी है !!-saira©

तुम !!

तुम !!
कभी इशक़ तु, कभी अश्क तु!
कभी दर्द तु, कभी मर्ज़ तु!
और मैं कभी अर्श पे, कभी फर्श पे!
कभी घर मेरा , कभी राह तु ! 
मेरी चाहत और राहत भी तु !
और दिल घुमता है तेरे चार सु!
कभी कोई गिला ..या इबादत का सिला ..!
कभी आस और कभी प्यास तु !
कभी आईना कभी अक्स तु
कभी तु रूबरू ,कभी मैं भी तु !
मेरा नाम भी निशान भी तु
कभी दिल हु मैं कभी जान तु
मैं कुछ नही तेरे बिना ,
मेरा कोई नही तेरे सिवा
"मोहब्बत " !!-saira©

shbd

दिन भर तलाश ए स्कुं में गुम रहा सारा शहर,,,,
रात भी बेचैनीयाँ ही ले के लौटी है
कौन क्हता नींद से आराम मिलता
हाँ दुआओ का सिला ज़रूर मिलता है
तो सुनो.... दुआओं में मुझे बस याद रखना तुम!!saira©

यहाँ अपना पराया कोई नहीं
बस मकसद के रिश्ते नाते हैं
सब खुद से लड़ते रहते है
उल्फत का दीवाना कोई नहीं!!- saira

मेरी नज़्म की नाब्ज जाने क्युँ बैठी जाती है,
तेरा ज़िक्रि आता है तो दुनिया उलझ सी जाती है,
के मेरे किस्सों में शामिल है तु आजकल,
देख उल्फत क्या रंग लाती है,
मेरी बदनामी रोज़ बड़ती जाती है!!-saira©

गुज़ारिशें बे हिसाब सुन के आयी है,
ये शब ए मिराज़ कितना बन संवर के आई है!
कितना हसीन चाँद लेके आई है
ये नेहमत ए इबादत आज ईद बन के आई है!!-saira©
guzarishen be hisaab sun ke aayi hai,
yeah e miraz kitna ban savar ke aayi hai,
Kitna haseen chaand leke aayi hai,
ye nehmat e ibadat aaj eid ban ke aayi hai!!-saira©

बडा इतरा के बरसा है सावन ये आज तो...
गौर से देख किस हसीन का काजल घुला है बादल में !!!-saira©


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