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Wednesday, 25 March 2015

in love

हर लम्हां आज़ाद हैं जिंदगी का आज कल तेरे पहलु में ...
और लोग कहते हैं मैं गिरफ्तार हु इश्क में तेरे !-saira
har lamha aazaad hai zindgi ka aaj kal tere pehlu mein,
aur log kehte hain main girftaar hu ishq mein tare !!!- saira

बेशकीमती लोग

मेरी कलम से जब तुम कमल की तरहां 
कागजों पे उभरते हो, तब एहसास होने लगता है 
कुछ लोग कहीं रहें, किसी हाल हों ...
वो बस बेशकीमती होते हैं
और उनकी यादें किसी इबादत की तरह पाक़ !! -saira

hava

कभी सुनी हैं हवा में जो आवाजें बहती रहती है ....
मर जाते हैं सिर्फ लम्हें .. ...
और सदियाँ फ़साने कहती रहती हैं !! -saira

dua ki trhan

अब दिल भी धड़कता है तो शोर लगता है ..
उनकी खामोश आँखों में जब से घर बनाया है !!
अब तैरते रहते हैं ख़ुशी के आसुओं की तरहां
उन की आँखों में .... 
और चमकते रहते है किसी पुरी हुई दुआ की तरहा !! - saira

एक ही नज़र से देखता है!!.


मांग के देख कभी दिल से क्या चाहिए??
वो जो देने वाला है महज़ शिद्दत ही देखता है !!
नहीं देता कभी कुछ तो कोई बात नहीं
वो कारसाज़ हमारे अमल देखता है !!
दिया है सब को अपने हिस्से का इमान
वो अक्सर इमान की जान देखता है !!
ख़ुदा ने इश्क किया है सब से
हर फैसले में तेरी राजा देखता है !!
शिफ़ा दे देता है हर गम से हमे
वो जख्मों से रिसती दुआ देखता है !!
सब का इन्साफ उसी को करना है ,
वो कहाँ कोई छोटा बड़ा देखता है !!
लाख शिकायतें तुम खुदा से करो
वो तुम्हारे सजदे का वजन देखता है !!
कोई धर्म नहीं खुदा के प्यारों का
वो हर शय को एक ही नज़र से देखता है -saira
maang ke dekh kabhi dil se kya chaheye...??
vo jo dene wala hai mahaz shiddat hee dekhta hai ..!!
nahi deta kabhi kuch to koi baaat nahi
vo kaarsaaz hamare amal dekhta hai !!
diya hai sab ko apne hissey ka imaan,
vo aksar imaan ki jaan dekhta hai !!
khuda ne ishq kiya hai sab se,
haraisle mein teri raza dekhta hai !!
shifa de deta hai har gam se hume.
vo jakhmon se risti dua dekhta hai !!
sab ka insaaf usee ko karna hai
vo khaa koi chota bada dekhta hai !!
laakh shikayte tum khud se karo
vo tumhare sajdon ka vajan dekhta hai !!
koi dharam nahi khuda ke pyaaron ka ,
vo har shay ko ek hii nazar se dekhta hai !!-saira

dil

क्या कहु दिल से अब कुछ नहीं कहना 
इसने किस का कहा सुना है?... जो मेरी सुनेगा !! -saira

Monday, 16 March 2015

कुछ बाकी है !!

 कुछ बाकी है !!
इंतज़ाम और करो अभी मुझ में साँस बाकी है
मैं यूं ही फिजाओं में न रह जाऊ कहीं ...
मिटा दो मुझे  के मुझ में इमान  अभी  बाकी है !!

बे लिहाज़ दिल धडकता है तुम्हारे नाम से
कही पा ही   न जाऊ तुम्हें ....
कुछ करो ...बे करार दिल  और दिमाग अभी  बाकी है!!

मैंने थाम के रखी है कुछ हसीं यादें ..
उम्र गुजरी है और अभी कुछ और बाकी है
ये जिंदगी की रफ़्तार अब भी बाकी है ..!!

ता उम्र का तजुरबा  ले के बैठे हैं ....
साया करते हैं  साँस देते हैं  और तपश सहते  रहते हैं ....
इन पेड़ों पे परिंदों के कुछ मकान अब भी बाकी है !!

तोड़ दो  धागा हर एक रिश्ते का
कहीं फिर से जुड़ न कोई इंसान.. इंसान से
इस दुनिया में  इन्सना की पहचान अब भी बाकी है
 -saira