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Monday, 16 March 2015

कुछ बाकी है !!

 कुछ बाकी है !!
इंतज़ाम और करो अभी मुझ में साँस बाकी है
मैं यूं ही फिजाओं में न रह जाऊ कहीं ...
मिटा दो मुझे  के मुझ में इमान  अभी  बाकी है !!

बे लिहाज़ दिल धडकता है तुम्हारे नाम से
कही पा ही   न जाऊ तुम्हें ....
कुछ करो ...बे करार दिल  और दिमाग अभी  बाकी है!!

मैंने थाम के रखी है कुछ हसीं यादें ..
उम्र गुजरी है और अभी कुछ और बाकी है
ये जिंदगी की रफ़्तार अब भी बाकी है ..!!

ता उम्र का तजुरबा  ले के बैठे हैं ....
साया करते हैं  साँस देते हैं  और तपश सहते  रहते हैं ....
इन पेड़ों पे परिंदों के कुछ मकान अब भी बाकी है !!

तोड़ दो  धागा हर एक रिश्ते का
कहीं फिर से जुड़ न कोई इंसान.. इंसान से
इस दुनिया में  इन्सना की पहचान अब भी बाकी है
 -saira

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