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Saturday, 28 March 2015

किस्मत या करम ??

किस्मत का खेल कहते हैं लोग अपनी नाकामी और अपनी हर सक्सेस को भी
 इसी का सिला कह कर यह सेहरा भी बांध देते हैं अपनी किस्मत के सर!!
लेकिन ......क्या किस्मत ही के दम पे चलते हैं हम? दुनिया? या यह कायनात भी इसी की गुलाम है ??? 
ऐसा है तो क्यू करते हैं हम अपनी जनम पत्री पे यकीन .....क्यूँ उम्मीद नहीं टूटती ?क्यूँ नहीं मरता यकीन? अपने हाथ की लकीरों को मान लेते है वे टु सक्सेस और समझ लेते हैं शायद अपनी तक़दीर का मैप....मेहनत करना फिर भी हिस्सा है हमारा और करम करते रहना प्लान है, यानि की तय है ...नहीं तो किस्मत भी साथ नहीं देती ......ऐसा भी सुनते हैं और मज़े की बात मानते भी हैं...तो बहुत क्न्फ़ुसिंग है यह सब ....किस्मत या करम ??आखिर किस पे डेपेंड(depend) हैं इंसान का व्ज़ूद?-Saira

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