सारा दिन गुज़रा अब शाम की बात है
थकान हो चुकी अब आराम की बात है !
लेकिन मैं जानती हु ये सब कहने की बात है,
दिन के पहर ने सताया था
अब ख्वाबों के सताने की बात है !
मैंने दिन भर समझाया है दिल को शाम होने तक
अब शाम को समझायेंगे रात के सकूं भरे पहर के वास्ते !
चारो तरफ भागा है दीमाग मेरा अब आराम मांगता है
अपनी रात के वास्ते कोई अच्छा ठंडा ख्वाब मांगता है !
मैं डर डर की रात के आने का इंतज़ार करती ,
मैं किसी ख्वाब के आने का अरमान करती हु
सुबह से फिर लग जायेगा झमेला दुनियादारी का
चलो अभी कुछ पल आराम करती हु ...
हर दिन यही काम करती हु ... इसी
जद्दो ज़हद में जिंदगी तमाम करती हु !
थक जाती हु रोज़ , रोज़ आराम करती हु !
रोज़ खुद से झगडती हु,रोज़ रब से बात करती हु !!
जिंदा हु जमाने से ये सब से बड़ा काम करती हु ....!!-saira

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