ऐस नही की उसको फ़िक्र नही मेरी
हाँ वो ख़ुदा है तो सब का सोचता है !
किस किस को अता कर दे वो दिल का क़रार ?
वो इबादत और शिद्दत का वजन तोलता है !
लाख छुपा ले इश्क़ तू सारी दुनिया से
यह अज़ान बन के सारे शहर में कोंधता है !
सारी दुनिया अज़ीज़ उसको बस मेरे सिवा
क्या सितमग़र है वफ़ा की इन्तहा खोजता है !!
मेरी फ़िक्र न कर मैं ज़िन्दा रहुंगा,
भला मर के भी कोई दम तोड़ता है !!
होसला ए सफीना देखों, हावा बदले या पानी की रवां ,
नाख़ुदा बिन भी कभी लहरों पे डोलता है !!
कोइ वादा खिलाफी का इलज़ाम नही तुझ पे
मैं जनता हु जुदा हो के भी तु मुझे सोचता है! -सायरा

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