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Saturday, 28 March 2015

तु मुझे सोचता है

ऐस नही की उसको फ़िक्र नही मेरी
हाँ वो ख़ुदा है तो सब  का  सोचता है !

किस किस को अता कर दे वो दिल का क़रार ?
वो इबादत और शिद्दत का वजन तोलता है !

लाख छुपा ले इश्क़ तू सारी दुनिया से 
यह अज़ान बन के सारे शहर में कोंधता है !


सारी दुनिया अज़ीज़ उसको बस मेरे सिवा 
क्या  सितमग़र है वफ़ा की इन्तहा खोजता है !!

मेरी फ़िक्र न  कर मैं ज़िन्दा रहुंगा,
भला मर के भी कोई दम तोड़ता है !!

होसला ए सफीना देखों, हावा बदले  या पानी की रवां  ,
नाख़ुदा बिन भी  कभी लहरों पे डोलता है !!

कोइ वादा खिलाफी का इलज़ाम  नही तुझ पे
 मैं जनता हु जुदा हो के भी तु मुझे सोचता है! -सायरा

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