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Thursday, 22 October 2015

मेरी खमोश आंखों में बोलता है अब्र ए इश्क है शायद 
बडा शोर रहता है जब ये पानी 
बरसता है !!-saira©
कोह ए दिल से दुआ आती है तेरे स्कुन के वास्ते..
खुदा मेह्फूज और आसान रखे सब तेरे रासते ...आमीन !!-saira©

मैने धूप पहनी है आज और शाम का काजल लगाए हू 
चाँद का कंगन सजा के बैठी हू ...
अब तेरी आंख से छलकु तो इश्क बनु!!-saira©
Maine dhop pehni hai aaj aur shaam ka kajal lgaya hu,,
chand ka kangan saja ke baithi hu u...ab teri aankh se chalku toh ISHQ bnu.!! - saira©

बडा दर्दनाक है ये दिमाग के अंदर का अँधेरा लेकिन ....दिल है के जल जल के उजाला किये जाता है ... !!-saira©


ना तु ,ना मैं!!

ना तु ,ना मैं!!
गलतियों से जुदा
तु भी नहीं मैं भी नहीं.
दोनों इंसान हैं 
ख़ुदा तु भी नहीं मैं भी नहीं!!.
तु मुझे और मैं तुझे
इल्ज़ाम देते हैं मगर अपने अंदर झांकता
तु भी नहीं मैं भी नहीं.!!
गलतफहमियों ने पैदा कर दीं दिलों में दुरीयाँ
वरना फितरतन तो बुरा
तु भी नहीं मैं भी नहीं!
आज भी अधुरे हैं हम
उस खुदा के सामने...
बडा नफ़्स शामिल है
इस इन्सान होने में !
तंगदिली से उपर उठा
तु भी नही मैं भी नही
!! - saira©

sept2015

रंग ,महक और रोनकें बन के बैठे हैं 
तेरे अरमान मेरे ख्वाब बन के बैठे है!-saira©

बेशाक़ हर एक किरदार की उमर तय हुआ करती है,
फिर भी ..चाहते हैं हर रिश्ता है
हम ता उमर को और फिर उसके भी बाद भी !! - saira ©' 

रोज़ एहसास दिलाया जाता है गरीब को उसकी लाचारी का 
फिर भी नवाब जैसा ही पेश आता है 
रोज़ जताती है दुनिया के कोई बोझ हो तुम
ज़िन्द्गी है के फिर भी ज़िद्द में जीये जाती है !!-saira©

रात के कितने पहर हैं क्या जाने
तेरे इंतज़ार में मैने तारे हज़ार बार गिने!- saira©

मज्लिस ए सीयासत में शराफत से कुछ नही कर पाओगे !!
इस में तो बस गिर जाओ ज़्मीर से ,
के जितना नीचे जाओगे उतना ही उपर आओगे!!-saira©

हाथ छूटने से दिल के होसलें नही टूटा करते....
रिश्ते रूठ जाने से मुक़द्दर फुटा नही करते !!- saira

oct 2015

बहुत बढ गया है नफ़्स ए मोहब्बत मेरा
दुआओं में कोई शामिल नही तेरे सिवा !
मेरा बस राबता भी म्हज़ तुझ से है 
और दुनिया से कोई शिक्वा ना गिला !!-saira©

चंद फुलों की चाहत में 
तमाम उमर मिट्टी से लिपटा रहा वो बागबाँ
फुल खिले तो तक़दीर
में मज़ार,मन्दिर,गिरज़ा और सेज़ लेके आए हैं !!-saira©

कल से कल तक के सफ़र में 
ही ज़िन्द्गी तमाम होनी है 
कल क्या बीता खबर रहती है 
कल क्या होना है ??वो खुद के बस की बात होती है !!-saira©

खुद्गरज़ी गुनाह नही बे शक 
सब से पह्ले खुद का सोचा तो कहर क्युं बरपा !!-saira©

बड़ा आराम है मुफ़लिसी में आज कल
के कुछ खोने का डर नही 
मेरा युं भी यहां तो कुछ नहीं 
देख गरीबी मे कॉई फ़िक्र नही!!- saira ©

गुम्शुदा हुँ मैं ...लोग कहते हैं 
वो नही जानते मुझे मिल गया कोई !-saira©
gumshuda hu main ...log kehte hain
Vo nahi jante mujhe mil gya koi !-saira©

क्या क्या बदल रहा है 
कभी रंगत,कभी चेहरा
और कभी फितरत जाहान की!!-saira©

जाने दो

जो गुज़र गया उसे जाने दो... 
नई पीढ़ी को आगे आने.दो...
नया करो जो हुआ नहीं नहीं...
नया भारत जगमगाने दो, 
संसार में फिर से सोने की चीडिया कहलाने दो...
क्या पाया ?क्या खोया ?कल की बातें हैं.... जो गुज़र गया सो जाने दो....
मत बांटो जनता टुकड़ों में इसे एक ही कौम कहलाने.....!
बहुत हुआ है सब ने ही सहा है
अब सब को एक जान हो जाने दो!! --saira©

जगह्साई!!

जगह्साई!!
मेहमान अब भगवान नही है 
कोई कलम अबआज़ाद नही है 
कोई दलित अबबचने न पाये
देखो कोई अब दाल तक न खाए
हिंद के वारिस अब केवल हिंदू
मुसलमान अब घर अपने जाए
जितने धर्म हों अब उतने दंगे
फिर्कोँ में हम को अब बाँटा जाए
लुट लो खुद हीअब चैन अमन तुम
काहे कोई बाहर से आए??
जात पे काटो अब रंग पे बाँटो
आग लगा दो वतन को सारे
याद रहे ओ सत्ता वालो अब
बस कुर्सी न ये जलने पाए
देश को देदो दिशा नई तुम
दुख दिल से न जाने पाए
फिर भी एक निवेदन तुम से
रोक सको तो रोको ये मनचन
बंद करो अब विश का लंगर
गरिमा भंग न होने पाए
जगह्साई न होने पाए!!-saira©