मैंने माना और माना लिया अपना जनून ए इशक़ ,
तेरी गुमनामी तेरा इम्तेहान जारी रहे !
मुझे जानता है ज़माना तेरे नाम से,
ख़ुदा तेरी गुमनामी तेरी गुम्श्दगी जारी रखे !!
तेरा रुतबा मुबारक तेरी दुनिया वालों को,
मेरा दिल तेरी दीवानगी जारी रखे!
मेरे हुस्न ओ इशक का सदका तू यु ही आबाद रहे ,
वफ़ा मेरी बर्बादी जारी रखे !
तू थाम कोइ हाथ मेहँदी वाला
मेरी आँख मेरे काजल की रवानी जारी रखे !
लाख मिल जाएँ तुझे प्यार जताने वाले,
और तेरी तरह वफाओं में कमी जारी रखे !!
तू मिले न मिले मुझको लेकिन
बस अपने खयालों मे तु मुझ को जारी रखे !!
तुझे गम न सताए कभी बे वफ़ा होने का ,
खुदा तुझ में बे परवाही जारी रखे !!
आमीन !!- सायरा