क्या कहु? क्या लिखुं?
कुछ कोई सुनता ,पढ़ता ही नहीं!
कया मांगूं? क्या फरियाद करू ?
खुदा को भी अब फुर्सत नहीं !
क्या दे दूँ? क्या ज़ब्त करू?
मेरा काम का अब कुछ भी नहीं !
क्या जीतुं? क्या हारू?
रहना तो यहाँ कुछ भी नहीं !!
क्या यकीन ?क्या बे ऐतबारी ?
एक सा रहता कुछ भी नहीं !!
-saira (c)
