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Thursday, 16 June 2016

Rehta ek sa kuch bhi nahi

क्या कहु? क्या  लिखुं?
कुछ कोई सुनता ,पढ़ता ही नहीं!

कया मांगूं? क्या फरियाद करू ?
खुदा को भी  अब फुर्सत नहीं !

क्या दे दूँ? क्या ज़ब्त करू?
मेरा काम का अब कुछ भी नहीं !

क्या जीतुं? क्या  हारू?
रहना तो यहाँ  कुछ भी नहीं !!

क्या यकीन ?क्या बे ऐतबारी ?
एक सा रहता कुछ भी  नहीं !!
-saira (c)

Wednesday, 15 June 2016

कहीं यूँ न हो !!

कहीं यूँ न हो !!

ये जो तुम रोज़ इतरा के कहते हो के" मसरूफ हु मैं" ....
ये रिवायत एक दिन कही तनहा न कर दे तुम्हें मेरे रूठ ने के बाद!!

यु तो रोज़ रुठते हो, रोज़ मना भी लेते हैं हम तुम्हें,
तुम को बर्बाद ही न कर दें कहीं दिल टूटने के बाद !!

तुम से रोज़ बे-जः गुजारिशें जो मैं करता हु मेरे कमजोरी न समझ,
दिल कहीं पत्थर न हो जाए ये सिलसला छूटने के बाद !!

तमाम उम्र इंतज़ार की उम्मीद है तुझे मुझ से मगर ,
तू क्यूँ रंग बदलता है इस मुक्तसर से विसाल ही के बाद ??&       ~saira(c)

Tuesday, 14 June 2016

Duaa

दुआ दे रहा है ख़ुदा बस थोड़ा सा सबर रख,
तु इबादत में सर झुका ले और मंज़िल पे नज़र रख...!
कोई कमी नही की उसने इंसान बनाने में
बस तू इतना कर...के अपनी शिद्दत में कमी
न रख!!-©saira
Dua de rahA hai khuda bas thoda sa sabr rakh..
Tu ibadat mein sar juka le aur manzil pr naZar rakh..
Koi kami nahi Ki usne insaan bnane mein..
Bas tu itna kar apni shiddat mein kami na rakh

Monday, 13 June 2016

Friyaad

मेरी फरियाद तुझ तक आती है मौला ...!
देखें सवाली  की इबादत  क्या रंग लाती है मौला !!
तेरे दर से बे-शुमार मिलता  है, यूँ मुझ को ,,
के दमन ऐ फकीर  छोटा पड़ जाता है मौला!!
तेरे दर  से टूटता हु , बिखरता हु कभी ..
  जब सजदे में झुकता हु,
अर्श की  बुलंदी छु के आता हूँ मेरे मौला !!- saira

Tuesday, 1 December 2015

2nd dec2014

छुपा लेना यादों में हर लम्हां जो अज़ीज़ हो ....
क्या पता कब वक़्त बदले और कोई पास न हो !!-saira
ख़ाक छानी है बरसों तेरे दिल तक पहुँचने को 
यु ही नहीं गुज़रा तु मेरे दिल की गलियों से . !!-saira
Vo dil jisne mere dil ko paida kiya... Suna hai kal raat vo kuch ruka sa thaa...ruk ke usne mere leye kuch khaa sa thaa...shayad yhee ke usey mere tlaash hai!!~saira

2nd dec2015

ख़ुदा के नुर के कतरे है हर दिल में.... 
तो तु संभाल के रखना हर दिल जो तेरे आस पास हो !
इन्ही में शायद कोई बहुत ख़ास हो ...
जिसकी धड़कन से तेरी जिंदगी आबाद हो -saira©

Friday, 27 November 2015

rishtey

बड़ी दरारें हैं घर कीदीवारों में,
मुरम्त बाकी हैं कुछ रिश्तोंकी यक़ीनन!!-saira©