ये सुनी सुनाई बात है,
तुझे मुझ से प्यार है!!
सूनी सुनाई बात है,
तुझे मेरा इंतज़ार है !!
तुम मेरी तस्वीर बनाते हो ,
कुछ गीत के जैसा गुनगुनाते हो!!
तुम बे-नींद और बे ख्व़ाब भी रहते हो ,..
सूनी सुनाई बात है के ..बे चैन से रहते हो !!
सूनी सुनाई बातों पर यकीन करू तो कैसे ??
ये जो सब जानते हैं ..इस मैं भी को मानु कैसे?
मैं तब जानु जब तुम बोलो, तब मानु जो भेद ये खोलो ....
में कैसे ?...क्या एतबार करू .?
क्यों मैं तुम जैसे इंतज़ार करू?
कया तुम जैसे ही अपना वक़्त मैं भी बर्बाद करू?
या खुद ही कह दु जो मुझे तुम से सुन्ना है ??
अच्छा चलो छोड़ो अब कह भी दो !!
तुम्हें आज भी मुझ से ही प्यार है !!-saira ©
