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Sunday, 17 May 2015

बाकी है अभी....!!

बाकी है अभी....!!
छोड़  हिदायतें और हदें तोड़ सभी
मुझ को तु चाहिए अभी  के अभी !
क्यों कर इंतज़ार हो  कयामत का
हटा पर्दा कर दे मेरा हिसाब अभी !
 गुलाम ए  इश्क हु  लेकिन.....
 मुझे इतना तो बता........
मुझ पे ही हो रहे हैं क्यूँ ज़ुल्म सभी  ??
नज़र न फेर मेरी मज़ार से तु इस कदर
 बुझा है जिस्म मेरा ,,.. रूह... तो ज़िन्दा है अभी ....
 दिन भर से जीरहे हैं  इंतज़ार तेरा
तुझे आना ही है के रात तो बाकी है अभी -saira ©

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