कृष्ण -9
कहाँ रहे तुम सगरी रैना ..
कहाँ भये तुम हे घनश्याम
जावो मैं तो सों न बोलु
लाख पड़ो तुम हमरे पाँव ....
दीप जलाए नैनों का
पूजन का पुष्प सजाये..
मैं जागी , एक तारा जगा
कान्हा तुम न आये ...
कान्हा हम गोवर्धन पहुंचे
जमुना तट तेरी ख़ोज को आये
हम तुमरी गईया से पुछे
और नाचत रहे मयूर से पुछे ...
जग हँसे सब करें ठिठोली
मैं तुम बिन सगरा जग डोली
रूठू तो से तो से ही मानु
तुमरी न जानु मैं
तो बस तुमरी ही हो ली !!-saira ©
कहाँ रहे तुम सगरी रैना ..
कहाँ भये तुम हे घनश्याम
जावो मैं तो सों न बोलु
लाख पड़ो तुम हमरे पाँव ....
दीप जलाए नैनों का
पूजन का पुष्प सजाये..
मैं जागी , एक तारा जगा
कान्हा तुम न आये ...
कान्हा हम गोवर्धन पहुंचे
जमुना तट तेरी ख़ोज को आये
हम तुमरी गईया से पुछे
और नाचत रहे मयूर से पुछे ...
जग हँसे सब करें ठिठोली
मैं तुम बिन सगरा जग डोली
रूठू तो से तो से ही मानु
तुमरी न जानु मैं
तो बस तुमरी ही हो ली !!-saira ©

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