कृष्ण
काहे लिखूं मैं प्रीत की पतियाँ
तुम तो हो मेरे मन बसिया ..,
मोरे मन की तुम ही जाणों
हँसी करे तो करे सगरी सखियाँ ,
मैं तो तुमरे नयन का काजल
जगत में ढूंढे मो को संसार ये पागल ,
इन चरणन के धूल हूँ माधव..
और तुम कुंदन दियो बनाये ...
चले ब्रह्मांड तुम जो करो इशारा
तार दियो तुम ही जग सारा
गिरधर तुम मोरा मन बाँचो ..
देखो हमरी प्रीत न जांचो
आप ही रूठे.आप ही माने
तुमरी प्रीत कौन धागों संग बांधे !!-saira
काहे लिखूं मैं प्रीत की पतियाँ
तुम तो हो मेरे मन बसिया ..,
मोरे मन की तुम ही जाणों
हँसी करे तो करे सगरी सखियाँ ,
मैं तो तुमरे नयन का काजल
जगत में ढूंढे मो को संसार ये पागल ,
इन चरणन के धूल हूँ माधव..
और तुम कुंदन दियो बनाये ...
चले ब्रह्मांड तुम जो करो इशारा
तार दियो तुम ही जग सारा
गिरधर तुम मोरा मन बाँचो ..
देखो हमरी प्रीत न जांचो
आप ही रूठे.आप ही माने
तुमरी प्रीत कौन धागों संग बांधे !!-saira

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