कृष्ण..7
कहीं अगर मैं मीरा होती ,
कान्हा.. तुम मोरा एक तारा होते !
कहीं अगर मैं राधा होती,
रूप मोरा ... तुम कान्हा होते !
मैं कहीं अगर सुदामा होती
तुम मोरी प्रीत और स्नेह ही होते ....!
कान्हा मैं जो तुमरी मईया होती
तुम मोरी परछाई होते ....!
कान्हा ... का होता जो अर्जुन होती ..
कर्म मेरा तुम धर्म ही होते ....
कछु कहो कान्हा मैं तुमरे युग में जो होती ?
का होती ? या न होती ?
मोर मुकुट का पंख जो होती ?
या तुमरा पीताम्बर होती ..?
माटी की गगरीयां होती ?
कौनो राग या ठुमरी होती ?
जो भी होती मैं तुमरी ही होती ....
तुमरी ही कोई लीला होती ....
मीरा होती अगर मैं कान्हा
तु अमृत मैं विष ही होती ...! saira ©
कहीं अगर मैं मीरा होती ,
कान्हा.. तुम मोरा एक तारा होते !
कहीं अगर मैं राधा होती,
रूप मोरा ... तुम कान्हा होते !
मैं कहीं अगर सुदामा होती
तुम मोरी प्रीत और स्नेह ही होते ....!
कान्हा मैं जो तुमरी मईया होती
तुम मोरी परछाई होते ....!
कान्हा ... का होता जो अर्जुन होती ..
कर्म मेरा तुम धर्म ही होते ....
कछु कहो कान्हा मैं तुमरे युग में जो होती ?
का होती ? या न होती ?
मोर मुकुट का पंख जो होती ?
या तुमरा पीताम्बर होती ..?
माटी की गगरीयां होती ?
कौनो राग या ठुमरी होती ?
जो भी होती मैं तुमरी ही होती ....
तुमरी ही कोई लीला होती ....
मीरा होती अगर मैं कान्हा
तु अमृत मैं विष ही होती ...! saira ©

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