तोर नयन कमल. कानों में कुंडल ..
मुख मुरली और सोहे पंख मयुर..
रास करत दिन रैन... ओ कान्हा ...
कभी माया कभी छल हो जाओ ...
दरस दियो जिस ष्ण से मोको
हम खुद को रहे भुलाये ...
तोरे नयनन का काजल बन जाऊ...?
कुंडल का मोती बन जाऊ ...?
धुन मुरली की हो जाऊ ...?
कहो तो ....मयुर पंख सी कोमलता पहन के आऊ
या तो जैसे ही माया बन जाऊ ....??
तुमरी छाया बन जाऊ??
बोल न माधव ....
का जतन करूँ मैं जो सगरे जग तुमरी कहलाऊ ..!!?!!
तोहरी प्रीत बसे मोरे मन मा ...
मैं तुमरे मन में बस जाऊ ....?
पवन बनू या बनू उजाला ...?
धरा बनू या बरखा की धारा?
तोरे पग की मैं पयाल् बन जाऊ ???
का करू ?
का हो जाऊ ???..
कर लेने को एक स्पर्श तेहारा ....
कैसे प्रेम का पारस छु लु और
मैं भी बस प्रेम हो जाऊ .....!! - saira ©
मुख मुरली और सोहे पंख मयुर..
रास करत दिन रैन... ओ कान्हा ...
कभी माया कभी छल हो जाओ ...
दरस दियो जिस ष्ण से मोको
हम खुद को रहे भुलाये ...
तोरे नयनन का काजल बन जाऊ...?
कुंडल का मोती बन जाऊ ...?
धुन मुरली की हो जाऊ ...?
कहो तो ....मयुर पंख सी कोमलता पहन के आऊ
या तो जैसे ही माया बन जाऊ ....??
तुमरी छाया बन जाऊ??
बोल न माधव ....
का जतन करूँ मैं जो सगरे जग तुमरी कहलाऊ ..!!?!!
तोहरी प्रीत बसे मोरे मन मा ...
मैं तुमरे मन में बस जाऊ ....?
पवन बनू या बनू उजाला ...?
धरा बनू या बरखा की धारा?
तोरे पग की मैं पयाल् बन जाऊ ???
का करू ?
का हो जाऊ ???..
कर लेने को एक स्पर्श तेहारा ....
कैसे प्रेम का पारस छु लु और
मैं भी बस प्रेम हो जाऊ .....!! - saira ©

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