कृष्ण-१२
जा मैं तो सों न बोलु,
घूँघट के पट आज न खोलु
राधा संग रहो मगन तु ...माधव
मैं तो बिन सगरे जगत में डोलूँ
जा मैं तो सों न बोलु .....
सरल सगज़ है प्रीत ये मोरी
बुझु न कोई लीला तोरी
काहे तुम मन बसों हो मोरे
नयनन में तो राधा तोरे
जा मैं तो सों न बोलु ....
क्या जानुं किन जुग की
मैं प्यासी ...
बनी रहू तुमरी ही दासी
तुमरे दर्श की हूँ अभिलाषी
फिर भी ....
जा मैं तो सों न बोलु....
कान्हा तुम तो आस हो मोरी
तुमरे हाथ मोरी प्रीत की डोरी
जा मैं तो सों न बोलु ....
करो जतन कोई मो को मनवो
आज मेरे आंगन तुम आवो
पुष्प कोई और कुमकुम लावो
मन व्याकुल को तुम बहलावो
जा मैं तो सो न बोलु....
कान्हा मैं तुम से ही तुम तक
तुम मो को ख़ुद में अब खोजो
खुद सों रूठू जब तो संग रूठू
कैसे अपने प्राण सो छुटू...!!
©saira
जा मैं तो सों न बोलु,
घूँघट के पट आज न खोलु
राधा संग रहो मगन तु ...माधव
मैं तो बिन सगरे जगत में डोलूँ
जा मैं तो सों न बोलु .....
सरल सगज़ है प्रीत ये मोरी
बुझु न कोई लीला तोरी
काहे तुम मन बसों हो मोरे
नयनन में तो राधा तोरे
जा मैं तो सों न बोलु ....
क्या जानुं किन जुग की
मैं प्यासी ...
बनी रहू तुमरी ही दासी
तुमरे दर्श की हूँ अभिलाषी
फिर भी ....
जा मैं तो सों न बोलु....
कान्हा तुम तो आस हो मोरी
तुमरे हाथ मोरी प्रीत की डोरी
जा मैं तो सों न बोलु ....
करो जतन कोई मो को मनवो
आज मेरे आंगन तुम आवो
पुष्प कोई और कुमकुम लावो
मन व्याकुल को तुम बहलावो
जा मैं तो सो न बोलु....
कान्हा मैं तुम से ही तुम तक
तुम मो को ख़ुद में अब खोजो
खुद सों रूठू जब तो संग रूठू
कैसे अपने प्राण सो छुटू...!!
©saira
