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Saturday, 20 June 2015

कृष्ण-12

कृष्ण-१२
जा मैं तो सों न   बोलु,
घूँघट  के पट आज न खोलु
राधा संग रहो मगन तु ...माधव
मैं तो बिन सगरे  जगत में डोलूँ
जा मैं तो सों न बोलु .....
सरल सगज़ है प्रीत ये मोरी
बुझु न कोई लीला तोरी
काहे तुम मन बसों हो मोरे
नयनन में  तो  राधा तोरे
जा मैं तो सों न बोलु ....
क्या जानुं किन जुग की
मैं प्यासी ...
बनी रहू तुमरी ही दासी
तुमरे दर्श की हूँ अभिलाषी
फिर भी ....
 जा मैं तो सों न बोलु....
कान्हा  तुम तो आस हो मोरी
तुमरे हाथ मोरी प्रीत की डोरी
जा मैं तो सों न बोलु ....
करो जतन कोई  मो को मनवो
आज मेरे आंगन तुम आवो
पुष्प कोई और  कुमकुम लावो
मन व्याकुल को   तुम बहलावो
 जा मैं तो सो न बोलु....
कान्हा मैं तुम से ही तुम तक
तुम मो को ख़ुद में अब खोजो
खुद सों  रूठू जब तो संग रूठू
कैसे अपने प्राण सो छुटू...!!
 ©saira

Friday, 19 June 2015

आँखे ....

आँखे ....
आंखे भी जुबान रखती हैं
कुछ ख्व़ाब और अरमान रखती हैं
कभी कभी आँखे सवाल रखती हैं
और कभी जवाब और ला जवाब रखती हैं
आँखे सब दिल में रखती है
ये जहन से दिल तक की परवाज़ रखती है
आँखे खुद  में शबाब रखती हैं
 न थमने वाले सैलाब रखती हैं
गिरती हैं संभलती हैं ...
 और कभी कहीं जा के  लड़ती हैं
अजब जलवा हैं आँखों का के   सब पे गौर करती हैं
 झुक जाती हया से जनिब ए महबूब ये आँखे
आँखे बा क़ायदा मोहब्बत का एहतराम रखती हैं
बन सवार के उठती हैं ....जिस दिन आँखे   काजल से ..
उस पल अपनी पलकों पे मौत का सामन रखती है
कभी खामोश रहती हैं
कभी चिल्ला के कहती हैं "हम  आँखे हैं
 हर जज़्बे कीज़ुबान रखती हैं !!-©saira

Friday, 29 May 2015

सुनी सुनाई बात है !!....


ये सुनी सुनाई बात है,
तुझे मुझ से प्यार है!!
सूनी सुनाई बात है,
तुझे मेरा इंतज़ार है !!
तुम मेरी तस्वीर बनाते हो ,
कुछ गीत के जैसा  गुनगुनाते हो!!
तुम बे-नींद और बे ख्व़ाब  भी रहते हो ,..
सूनी सुनाई बात है  के ..बे चैन से रहते हो !!
सूनी सुनाई बातों पर यकीन करू तो कैसे ??
ये जो सब जानते हैं ..इस मैं भी को मानु कैसे?
मैं तब जानु जब तुम बोलो, तब मानु जो  भेद ये खोलो ....
में कैसे ?...क्या एतबार करू .?
क्यों मैं तुम जैसे  इंतज़ार करू?
 कया तुम जैसे ही अपना वक़्त मैं भी  बर्बाद करू?
या खुद ही कह दु जो मुझे तुम से सुन्ना है ??
अच्छा चलो  छोड़ो अब कह भी दो !!
तुम्हें आज भी मुझ से ही प्यार है !!-saira ©

Monday, 25 May 2015

बाद मुद्दत ...!!

बाद मुद्दत ...!!
बाद मुद्दत के होसला किया उसने ..
आज मेरा नाम भी लिया उसने !
बाद मुद्दत के ....
मैंने उसकी नींदे उड़ाके रखीं हैं
पलक झपका  तो ये  भी कहा दिया  उसने ...!
 बाद मुद्दत के ....
खुशबू सा महकता रहा वो एसहास मेरा
मेरे दामन को भी  आज  छु लिया  उसने ..!!
बाद मुद्दत के ....
अहद ए इश्क वो यूं भी किये बैठा था
क्या कमाल आज मुझ से कह दिया उसने !
बाद मुद्दत के ....
घिरा रहता था वो  जाने  किन खाव्बों ख्यालों में ..
मेरे तस्वीर रख के कह दिया... तखलिया उसने
बाद मुद्दत के ....
वो चाँद तका करता था रातों को जाग  के
वस्ल की रात आई तो कहा  चाँद भी पा लिया उसने !!
- saira ©

Sunday, 24 May 2015

कृष्ण-11

 तोर नयन कमल. कानों में कुंडल ..
मुख   मुरली और    सोहे पंख मयुर..
रास करत दिन रैन... ओ कान्हा ...
कभी माया  कभी छल हो जाओ  ...
दरस दियो जिस ष्ण  से मोको
हम खुद को रहे भुलाये ...

तोरे नयनन का  काजल बन जाऊ...?
कुंडल का मोती बन जाऊ ...?
धुन  मुरली की हो  जाऊ ...?
कहो तो ....मयुर पंख सी  कोमलता पहन के आऊ
या तो  जैसे  ही माया बन जाऊ ....??
तुमरी छाया बन जाऊ??
बोल  न माधव ....
का जतन  करूँ  मैं जो सगरे  जग  तुमरी कहलाऊ ..!!?!!

तोहरी प्रीत  बसे मोरे मन मा ...
मैं  तुमरे  मन में बस जाऊ ....?
पवन बनू या बनू उजाला ...?
धरा बनू या बरखा की धारा?
तोरे पग की मैं   पयाल् बन   जाऊ ???
 का  करू ?
 का हो जाऊ ???..
कर लेने को एक स्पर्श तेहारा ....
कैसे प्रेम का पारस छु लु और
मैं भी बस  प्रेम हो जाऊ .....!! - saira ©

Sunday, 17 May 2015

बाकी है अभी....!!

बाकी है अभी....!!
छोड़  हिदायतें और हदें तोड़ सभी
मुझ को तु चाहिए अभी  के अभी !
क्यों कर इंतज़ार हो  कयामत का
हटा पर्दा कर दे मेरा हिसाब अभी !
 गुलाम ए  इश्क हु  लेकिन.....
 मुझे इतना तो बता........
मुझ पे ही हो रहे हैं क्यूँ ज़ुल्म सभी  ??
नज़र न फेर मेरी मज़ार से तु इस कदर
 बुझा है जिस्म मेरा ,,.. रूह... तो ज़िन्दा है अभी ....
 दिन भर से जीरहे हैं  इंतज़ार तेरा
तुझे आना ही है के रात तो बाकी है अभी -saira ©

Friday, 15 May 2015

इश्क...... आफत की पुड़िया !!

इश्क...... आफत की पुड़िया !!
फतेह और शिकश्त का मज़ा आता है एक साथ
जब कहीं इश्क की बाजियां सी चलती हैं ,,,
मौत और जिंदगी होते हैं रूबरू ...
जब कहीं दो आँखे उलझती हैं !!
क्या आग क्या पानी ,क्या ज़मीन क्या आसमान ?
कोई जब इश्क करता है तो हर शय हुस्न होती है !
कोई दिल जीते या जान को हार दे अपनी
इश्क में कुछ भी हो ज़ालिम तमाशा रोज़ होता है
इश्क से मिले या ये बिछड़े दीवाना हर हाल रोता है
खुदा महबूब को कह दें या कह दे जान का दुश्मन
कोई भरोसा क्या इस आफत की पुड़िया का !!
-saira ©.
ishq......aafat ki pudiya...!!
fteh aur shekasht ka maza aata hai ek sath
jab kahee ishq ki baziyan si chalti hain!!
maut aur zindgi hote hain rubru
jab kahin do aankhe ulajhti hain
kya aag kya pani ,kya zamee kya aasmaan
koi jab ishq karta hai to har shay husn hoti hai
koi dil jeete ya jaan ko haar de apni
ishq mein kuch bhi ho zalim tamasha roz hota hai
ishq se mile ya yeh bichde ,deewana har har haal rota hai
khuda mehboob ko keh de ya kehde jaan ka dushman
koi bhrosa kya is aafat ki pudiya ka - saira ©.
— with Najmul Haq and 7 others.