लिख लिख रही मिटाये
"कान्हा" . मैं .मीरा अपना नाम
धरती पे लिखु
कभी गगन से बांधू
ह्रदय की पतंग विशाल
पात पात पे नाम तेहारा
फुल फुल में तेरी छाया
महिमा गावत जगत ये सारा
नाम रटत तेरा ..माधव
सांझ सवेरे मेरा ये इकतारा
पग में घुघर बाँध के नाचु
लाज छोड़ तेरी राह को बाचु
विष पी जाऊ अमृत लागे
बांधे तो संग प्रीत के धागे
केसर रंग में रंगा मेरा मन
श्रृंगार करू, और रास रचाऊ
में नाचू गाऊ संग तेहारे ...
तुम मेरे जीवन की नईया
तुम गवाल.. हम भय रे गईया
मैं मीरा तुम से ही मैं हूँ ..
और कोई दूजा न मोरा
मेरे मन में वास तेहारा
माधव, मोहन,कृष्ण , कन्हिया !!- saira
धरती पे लिखु
कभी गगन से बांधू
ह्रदय की पतंग विशाल
पात पात पे नाम तेहारा
फुल फुल में तेरी छाया
महिमा गावत जगत ये सारा
नाम रटत तेरा ..माधव
सांझ सवेरे मेरा ये इकतारा
पग में घुघर बाँध के नाचु
लाज छोड़ तेरी राह को बाचु
विष पी जाऊ अमृत लागे
बांधे तो संग प्रीत के धागे
केसर रंग में रंगा मेरा मन
श्रृंगार करू, और रास रचाऊ
में नाचू गाऊ संग तेहारे ...
तुम मेरे जीवन की नईया
तुम गवाल.. हम भय रे गईया
मैं मीरा तुम से ही मैं हूँ ..
और कोई दूजा न मोरा
मेरे मन में वास तेहारा
माधव, मोहन,कृष्ण , कन्हिया !!- saira

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