महज़ मिट्टी का एक पुतला हु वक्त की आंधी से बिखर जाऊंगा...
और मैं मिट्टी में भी मिला तो इसी फिज़ा में रह जाऊंगा
फिर से उठूँगा और फिर से संवर जाऊंगा
खुदा की करामात हु उसी में घुल जाऊंगा !!-saira
और मैं मिट्टी में भी मिला तो इसी फिज़ा में रह जाऊंगा
फिर से उठूँगा और फिर से संवर जाऊंगा
खुदा की करामात हु उसी में घुल जाऊंगा !!-saira

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