हज़ार ज़ख्म लिए फिरते हो ....
गज़ब बात है के अब भी दिल ही लिए फिरते हो ..!
कौन सुनता है यहाँ दिल के किस्से ...
अजब बात है के जुबान लिए फिरते हो ...!
कोई जुड़ता नहीं यहाँ किसी से ....
तु बे जा तलवार लिए फिरते हो ..!
ला इलाज़ होता इश्क मेरी जान ....
तुम फिर भी अरमान लिए फिरते हो ....!
कोई खौफ नहीं अब यहाँ खुदाई का ..
तुम हो के ईमान लिए फिरते हो ....!
दगा देते है यहाँ सितारे सारे...
तुम काहे उधारी का चाँद लिए फिरते हो ....!
दिलों की ग़ार में जब अब तलक अँधेरा है
तुम किस उम्मीद का चिराग़ लिए फिरते हो ,!
बे वफाई, बे दिली, बे परवाही के ज़माने में ........
तुम क्या क्या जीने के सामन लिये फिरते हो
मुबारक के जहाँ सब टूटा फूटा है ,
तुम वहां पंख और परवाज़ लिए फिरते हो ???- saira

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