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Tuesday, 28 April 2015

gulab जान

ये कैसा गुलाब  है जो अब तक महकता है
गुनगुनाता, ठुमकता और दिल जैसा धडकता
हमारे सीनों में आज तक और फिर  सदा के  लिये .....!!

कुछ भी न लिया तेरी कायनात से  या रब
बस एक कतरा नूर एक पायल और कुछ
नगमे जो जमाने को याद है ,,,,
मुझे महकने दो  सदा के लिये बस इत्ती सी फरियाद है
 ये  मेरा  फन है रूह  मेरी ...यही मेरी जान है !!!

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