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Tuesday, 7 April 2015

हम...!!

हम...!!
तु जब तु न रहे ..
और मैं... मैं न रहु...
तब हम रहेंगे सदा के लिये ....
दो दिल एक ताल में धड्केंगे 
वफ़ा के लिये ...
मेरा तुम्हार प्यार
जब हमारा होगा ...
ये खज़ान बनेगा जहां के लिये ...
तु मुझ से मैं तुझ से मिलते रहें
कोई सरहद न हो बस
खुदा के लिये ...
बहता रहें आब बन के
इबादत ए इश्क अपना
कोई प्यासा न रहे दिल की दुआ के लिए ...!! -saira

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