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Monday, 20 April 2015

समर्पित कृष्ण - 5..

  समर्पित कृष्ण - 5..

न  आकाश  में जीवन मोरा  ,
न मैं  बसूं पताल
  हे मीरा.. मैं तोरे नयन का दीपक
घर मोरा  तुमरा  ह्रदय विशाल !!

का  ढूंढ़ों  यु नगरी नगरी ??
 तु मन  के भीतर  झाँक
का  मांगे तु का तो  को देदु ?
मुरली की सब धुन तुमरी हैं
तो के प्रीत  से  हम भये
घनशयाम !
 .
हे मीरा  मैं  तुम्हरा ही  हिस्सा
तुम्हरा प्रेम मेरीमन  इच्छा
बस मन को  भटकावो  नहीं
मैं और तुम  बस संग हैं यूं  ही
जीवन से पूर्व फिर मरण उपरान्त

एक प्राण एक  ह्रदय हैं हम तुम
ये मेरे मुरली और माखन
ये मेरे  गइया और गोपी
सब ही मो सों प्रेम करें हैं..
और मैं तुम मेरी भक्ति की पूरक
.....
मैं तुमरे आदर्शों का  दर्पण .
मो   को करो तुम  जीवन अर्पण ..
.मोरा  स्नेह और सब आशीष  तुम्हे हैं
मो सो जो तुम प्रीत हो  बांधे ..लो
कान्हा  भी  कर दिए समर्पण ..!! -saira




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